लखनऊ राजधानी लखनऊ स्थित होटल क्लार्क्स अवध के रंग महल हॉल में जनाब तारीक़ सिद्दीक़ी एवं जनाब सैफ़ अली नक़वी की जानिब से “उत्तर प्रदेश की तामीर-ओ-तरक़्क़ी में मुस्लिम समाज का किरदार” के मौज़ू पर एक ख़ुसूसी इंटरैक्टिव सेशन का कामयाब इनइक़ाद किया गया। नशिस्त में समाज के मुख़्तलिफ़ तबक़ों से ताल्लुक़ रखने वाले दानिशवरों, तालीमी शख़्सियात, समाजी रहनुमाओं और सिविल सोसायटी के नुमाइंदों ने बड़ी तादाद में शिरकत की।
नशिस्त के मेहमान-ए-ख़ुसूसी एवं प्रभारी उत्तर प्रदेश कांग्रेस राजेंद्र पाल गौतम ने अपने ख़िताब में दस्तूर-ए-हिंद, जम्हूरियत, सेक्युलरिज़्म, मुसावात (समानता), इंसाफ़ और हमआहंगी के बुनियादी उसूलों पर तफ़्सील से रौशनी डालते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की तामीर-ओ-तरक़्क़ी में मुस्लिम समाज का किरदार हमेशा से अहम रहा है। उन्होंने तालीम, रोज़गार, समाजी इत्तेहाद, नौजवानों की रहनुमाई और बराबरी की बुनियाद पर तरक़्क़ी को वक़्त की अहम ज़रूरत बताते हुए मौजूद हाज़रीन से तबादला-ए-ख़याल भी किया।प्रोग्राम को खिताब करते हुए प्रो अली खान महमूदाबाद ने कहा मुसलमान वही चाहते हैं जो इस देश का हर नागरिक चाहता है—सुरक्षा, संसाधनों तक समान पहुँच, विशेष रूप से स्वास्थ्य और शिक्षा, तथा शासन-प्रशासन में उचित प्रतिनिधित्व।
साल 2012 से 2017 के बीच समाजवादी पार्टी की सरकार में एक मुस्लिम मुख्य सचिव (Chief Secretary) और एक मुस्लिम पुलिस महानिदेशक (DGP) थे। क्या आज ऐसी स्थिति की कल्पना की जा सकती है? हमारी माँगें केवल पहचान, भाषा और धर्म तक सीमित नहीं होनी चाहिए। समुदाय का राजनीतिक नेतृत्व कहाँ है?हमें बहुजन समुदाय सहित अन्य वंचित और हाशिए पर मौजूद समुदायों के साथ एकजुटता कायम करनी होगी, ताकि हम एक-दूसरे के मुद्दों का समर्थन करें और उनके लिए मिलकर संघर्ष करें। नशिस्त के दौरान उपस्थित वक्ताओं ने तफ़्सील से मुस्लिम समाज से जुड़े मौजूदा हालात, हालिया घटनाक्रम तथा पहचान (आइडेंटिटी) के नाम पर हो रही नाइंसाफ़ियों और भेदभाव के विभिन्न पहलुओं को प्रभारी श्री राजेंद्र पाल गौतम के समक्ष मजबूती से रखा। वक्ताओं ने तालीम, रोज़गार, समाजी व सियासी हिस्सेदारी, दस्तूरी हक़ूक़ की हिफ़ाज़त तथा बराबरी के उसूलों को मज़बूत करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। प्रभारी महोदय ने तमाम सुझावों और मसाइल को गंभीरता से सुना तथा भरोसा दिलाया कि संविधान, इंसाफ़, मुसावात और सेक्युलर उसूलों के तहत उठाए गए जायज़ मसाइल को पार्टी मंच पर प्रभावी ढंग से उठाया जाएगा।