लखनऊ: आज नियम 115 के अंतर्गत राजस्व मामलों से संबंधित विषय उठाते हुए विधान परिषद सदस्य विजय बहादुर पाठक ने लोक अदालत की तर्ज पर राजस्व जन अदालत शुरू करने की माँग की।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथनाथ जी के कुशल नेतृत्व में आमजन के हित में लिए जा रहे फैसलो के कारण राजस्व संबंधी मामलो में आषातीत सफलता मिल रही है। घरौनि का वितरण हो या भूमि विवाद संबंधीत प्रकरण अधिकारियों की जवाब देही तय करते हुए समाधान निकाले जा रहे है। किन्तु प्रदेष के राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। नामांतरण, बटवारा, सीमांकन, कब्जा, बेदखली सर्वजनिक सम्पतियो पर अवैध ढंग से कब्जे आदि से संबंधित वाद बडी़ संख्या में लंम्बित हैं।read more:https://pahaltoday.com/cmo-saved-the-lives-of-passengers-injured-in-a-road-accident/ इन मामलो के समयबद्ध निस्तारण के निर्देष भी है किन्तु उपजिलाधिकारी, तहसीलदार नायब तहसीलदारों पर अत्यधिक प्रषासनिक दायित्वों का भार होने के कारण वर्शो से लंम्बित वादों के निस्तारण की गति मंद है। जिस कारण इसका प्रतिकूल प्रभाव किसानों गरीबो पर पड़ रहा है। वे अनावष्यक रूप से परेषान हो रहे है। कई बार भूमि संबंधीत विवाद इस सीमा तक बढ जा रहे है कि वे कानून व्यवस्था तक के लिए चुनौती बन जाते है। अतः लोक महत्व के इस सुनिष्चित अविलम्बनीय विशय पर सरकार का ध्यान आकृश्ठ करते हुए प्रदेष में राजस्व न्यायालयों में लंम्बित वादों के समयबद्ध निस्तारण हेतु लोक अदालत की तर्ज पर “राजस्व जन अदालत” शुरू करने की ठोस कार्य योजना बनाये जाने की मांग करता हूँ।