गाजीपुर। जिले के करंडा थाना क्षेत्र के कटारिया गांव में हाल ही में हुए पथराव और हिंसक बवाल के मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। पुलिस ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) के 47 नेताओं को नामजद करते हुए मुकदमा दर्ज किया है, जबकि करीब 200 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। यह कार्रवाई करंडा थानाध्यक्ष की तहरीर पर की गई है।read more:https://khabarentertainment.in/a-golden-era-for-fishermen-in-himachal-a-guaranteed-%e2%82%b9100-msp-and-a-deluge-of-subsidies-will-improve-livelihoods/
घटना की पृष्ठभूमि 15 अप्रैल 2026 से जुड़ी है, जब गांव की निवासी निशा विश्वकर्मा का शव गंगा नदी पुल के पास संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था। इस घटना से क्षेत्र में तनाव फैल गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए 19 अप्रैल को हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया और पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसके बाद 22 अप्रैल को समाजवादी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मिलने कटारिया गांव पहुंच रहा था। प्रशासन के अनुसार, पूर्व निर्धारित संख्या से कहीं अधिक समर्थकों के एकत्र होने से स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। पुलिस ने जब भीड़ को रोकने का प्रयास किया, तो विवाद बढ़ गया और देखते ही देखते पथराव शुरू हो गया। इस हिंसक झड़प में करंडा थानाध्यक्ष समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। वहीं एक युवक और एक महिला को भी गंभीर चोटें आईं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालात को काबू में करने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा और अतिरिक्त फोर्स भी बुलाई गई। पुलिस द्वारा नामजद किए गए प्रमुख आरोपियों में जिलाध्यक्ष गोपाल यादव, विधायक जैकिशन साहू (सदर), विधायक विरेन्द्र यादव (जंगीपुर) सहित कई स्थानीय पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हैं। इसके अलावा जिला पंचायत सदस्यों, ब्लॉक स्तर के नेताओं और अन्य कार्यकर्ताओं के नाम भी एफआईआर में दर्ज किए गए हैं। सूची में महिला सभा की जिलाध्यक्ष समेत विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक पदों से जुड़े लोग भी शामिल हैं। पुलिस अधीक्षक डॉ. ईराज राजा ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और गहन जांच की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल या पद से जुड़ा क्यों न हो। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जांच के दौरान साक्ष्यों के आधार पर और भी लोगों के नाम सामने आ सकते हैं, जिनके खिलाफ आगे कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल गांव और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस की कड़ी निगरानी जारी है। संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की अफवाह या तनाव को समय रहते नियंत्रित किया जा सके। यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि राजनीतिक गतिविधियों के दौरान भीड़ प्रबंधन और प्रशासनिक समन्वय की चुनौतियों को भी उजागर करती है। आने वाले दिनों में इस मामले की जांच और कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।