डाला, सोनभद्र। शासन द्वारा मत्स्य प्रजनन काल को देखते हुए 1 जुलाई से 31 अगस्त तक रिहन्द डैम समेत अन्य जलाशयों में मत्स्य आखेट पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बावजूद रिहन्द डेम में खुलेआम अवैध मत्स्य आखेट जारी रहने के आरोप सामने आने से मत्स्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली कटघरे में आ गई है। प्रतिबंध अवधि में बाजारों में बड़ी संख्या में बड़ी मछलियों की बिक्री यह सवाल खड़ा कर रही है कि आखिर ये मछलियां आ कहां से रही हैं।
जानकारी के अनुसार, सहायक निदेशक मत्स्य सोनभद्र ने 7 जुलाई 2026 को पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर सभी थाना प्रभारियों को निर्देशित किया था कि रिहन्द डेम, धंधरौल डेम, कड़ियाताल, पुरखास्टाल समेत संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस, मत्स्य विभाग और ठेकेदारों के साथ नियमित संयुक्त गश्त कर अवैध मत्स्य आखेट पर प्रभावी रोक लगाई जाए। साथ ही जिलाधिकारी के आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को भी कहा गया था। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्देश सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए हैं।read more:https://khabarentertainment.in/prof-dr-rajendra-rajput-receives-guru-shree-2026-award-at-national-level-brings-honour-to-ghazipur/उनका कहना है कि प्रतिबंध के बावजूद रिहन्द डेम में दिनदहाड़े जाल डाले जा रहे हैं और मछलियों से लदे वाहन शक्तिनगर, रेणुकूट, बीजपुर और म्योरपुर मार्ग से बेखौफ गुजर रहे हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब प्रमुख मार्गों और थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, तो फिर अवैध परिवहन पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। सबसे बड़ा सवाल बाजारों में बिक रही बड़ी मछलियों को लेकर उठ रहा है। प्रतिबंध अवधि में यदि मत्स्य आखेट पूरी तरह बंद है, तो इतनी बड़ी मात्रा में ताजी बड़ी मछलियां आखिर किस श्रोत से बाजार तक पहुंच रही हैं। यह स्थिति विभागीय निगरानी और संयुक्त गश्त की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। स्थानीय नागरिकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर प्रतिबंध अवधि में अवैध मत्स्य आखेट कराने वालों के साथ-साथ लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और कठोर कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि शासन के आदेशों के बावजूद खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ती रहीं, तो पर्यावरण संरक्षण और मत्स्य संसाधनों के संवर्धन की पूरी व्यवस्था केवल कागजी साबित होकर रह जाएगी।