बाराबंकी। जनपद बाराबंकी जिन शख्सियतों के कृतित्व, सेवा और संघर्ष से समृद्ध हुआ, वे अपने निजी जीवन और विचारों में कैसे थे, अपने समकालीनों और कनिष्ठों को लेकर उनकी राय क्या थी? इस पर समाजसेवी और प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. अबरार हक उस्मानी की चर्चित पुस्तक ‘बाराबंकी के नगीने’ आई है। जिसका रविवार को शहर के एक निजी होटल में विमोचन किया गया। बता दें डॉ. अबरार हक उस्मानी के लिए साहित्य सेवा एक जुनून की तरह है। वे अभी तक चिकित्सक की भूमिका में नजर आते रहे हैं, लेकिन इन दिनों साहित्य और समाजी दुनिया में वह लगातार अपना योगदान दे रहे हैं। पुस्तक ‘बाराबंकी के नगीनें’ में उन्होंने खुमार बाराबंकी, सागर आजमी, मुकेश सिंह, डा. रामगोपाल वर्मा, डॉ. रामचन्द्र यादव, डॉ एस.एस वर्मा, सूफी उवेर्दुरहमान, चौधरी अली मुबारक उस्मानी, इकराम उर रहमान किदवाई, रिजवान उर रहमान किदवाई, शमशी मिनाई, डॉ असद अब्बास, मास्टर जलील यार खान, प्रिंसपल इरादत हुसैन समेत कई नामवर शख्सियतों की यादों को संजोया है, जिनकी ज़िन्दगी अज़्म, हिम्मत, खि़दमत-ए-ख़ल्क़ और इंसानियत की रोशन मिसाल है। जिनसे आज की पीढ़ी को उस समूचे दौर के साथ ही इन शख्सियतों को भी जानने में मदद मिलती है। यह पुस्तक अपने आप में एक युग को समेटे हुए है। वह युग जिनके बिना बाराबंकी का इतिहास अधूरा है। यह किताब बाराबंकी के उन 30 महान समाजसेवियों के संघर्ष, समर्पण और उत्कृष्ट कार्यों को समर्पित है, जिन्होंने निःस्वार्थ भाव से समाज को नई दिशा दी है। कार्यक्रम के दौरान डॉ. अबरार हक उस्मानी ने अपनी लेखन यात्रा साझा की। उन्होंने बताया कि यह किताब फेसबुक और व्हाट्सएप पर लिखी कुछ पंक्तियों से शुरू हुई थी। डॉ. उस्मानी, जो स्वयं गरीब-बेसहारा बच्चियों की शादी कराने, जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाने और मुफ्त मेडिकल कैंप के जरिए हजारों जिंदगियों को संवारने जैसे सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे हैं, ने बताया कि उनकी बेगम उनके लेखन से बहुत खुश होती थीं।read more:https://khabarentertainment.in/relief-rain-falls-from-the-sky-in-bhadohi-the-carpet-city/उनकी बेगम हमेशा सलाह देती थीं कि किसी के बारे में भी लिखते समय केवल उसकी अच्छाइयों और संघर्ष को ही सामने लाना चाहिए, कमियों को नहीं। डॉ. उस्मानी ने बताया कि 20 अगस्त 2020 को बेगम के अचानक निधन के बाद वे पूरी तरह टूट गए थे और उनका कलम रुक गया था। हालांकि, बाद में बेगम की यादों और उनकी इच्छा को जीवित रखने के लिए उन्होंने न केवल दोबारा लिखना शुरू किया, बल्कि श्फालदना बेगम बेमिनल ट्रस्टश् का गठन भी किया। इसी ट्रस्ट के माध्यम से वे आज शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज सेवा के कई कार्य कर रहे हैं, ताकि उनकी बेगम की आत्मा को शांति मिल सके। यह पुस्तक बाराबंकी के गौरवशाली इतिहास और यहां के ‘असली नगीनों’ की कहानियों को हर नागरिक तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गई है। समारोह के दौरान उपस्थित अतिथियों ने भी पुस्तक की सराहना की और इसे सामाजिक जीवन के महत्वपूर्ण अनुभवों का संग्रह बताया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कहा कि यह पुस्तक केवल संस्मरण नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण की भावना को समझाने वाली प्रेरणादायक कृति है। इस कार्यक्रम में डॉ तौहीद रज़ा, साहित्यकार मूसा खान अशान्त, सगीर नूरी, आमिर किदवाई समेत 14 लोगों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता जुबेर अहमद अन्सारी ने की। पुस्तक का विमोचन एरा यूनीवर्सिटी, लखनऊ के उपकुलपति प्रोफेसर (डा) अब्बास मेहंदी, अली मिया यूनानी मेडिकल कालेज, लखनऊ के डायरेक्टर डाक्टर अरशद अली, डाक्टर अनवर हुसैन खान, डॉ. मखमूर काकोरवी, डा अरशद अली एवं इकरामुल हक उस्मानी ने किया। कार्यक्रम का संचालन फजल इमाम मदनी ने किया। कार्यक्रम में शायर उस्मान मिनाई, हुमायूं नईम खान, मौलाना मिनहाज सहित शहर की प्रतिष्ठित हस्तियां और प्रमुख समाजसेवी मौजूद रहे।