मनरेगा के बाद ई-निविदा प्रकाशन बना सरकारी धन के लूट का जरिया

Share

सोनभद्र। प्रदेश के अति पिछड़े जिलों में शामिल जनपद सोनभद्र के अधिकांश ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार चरम पर है। बसपा शासन काल में वर्ष 2010-11 में उजागर हुए करीब 350 करोड़ के बहुचर्चित मनरेगा घोटाला की तर्ज पर ही अब ग्राम पंचायतों में ई-निविदा प्रकाशन के नाम पर सरकारी धन की लूट मची है। शासन-प्रशासन के आदेशों को दर-किनार करते हुए अपने चहेते ठेकेदारों को सीधे तौर पर आर्थिक लाभ पहुंचाने की नीयत से मनमानी तौर पर प्रकाशित करायी गई ई-निविदा प्रकरण की यदि सीबीआई जांच करा दी जाए तो न केवल एक बड़ा भ्रष्टाचार उजागर होगा, बल्कि शासनादेश के विपरीत ई-निविदाओं का प्रकाशन कराने वाले पंचायती राज विभाग के कुछ अधिकारियों के साथ ही तमाम सचिवों पर कार्रवाई की गांज गिर सकती है।ग्राम पंचायतों में सरकारी खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी, निष्पक्ष और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए पर्याप्त प्रचार-प्रसार वाले समाचार पत्रों में ई-निविदा का प्रकाशन कराया जाता है, लेकिन पंचायती राज विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से तमाम सचिवों द्वारा अपने चहेते ठेकेदारों को सीधे तौर पर आर्थिक लाभ दिलाने की नीयत से ऐसे समाचार पत्रों में सामग्री आपूर्ति के लिए ई-निविदाओं का प्रकाशन कराया गया है, जो समाचार पत्र कभी भी जिले में नियमित रूप से आते ही नहीं हैं। तमाम ऐसे भी समाचार पत्रों में ई-निविदाओं का अधिक रेट में प्रकाशन कराए जाने की जनचर्चा है, जिसका कोई नाम तक नहीं जानता है।बतादें कि सूचना एवं जन संपर्क विभाग कार्यालय लखनऊ द्वारा बीते 16 मई 2025 को प्रदेश के समस्त जिलाधिकारियों को पत्र संख्या 788 प्रेषित कर जिला सूचना अधिकारी की रिपोर्ट प्राप्त करने के पश्चात ही किसी भी सरकारी एवं अर्धसरकारी कार्यालयों का विज्ञापन, समाचार पत्रों में प्रकाशित कराए जाने का फरमान जारी किया गया है। शासन के निर्देश के क्रम में जिलाधिकारी ने भी बीते 21 जुलाई 2025 को संबंधित अधिकारियों को शासन की मंशानुरूप कार्य करने के लिए आदेशित किया गया है। बावजूद इसके शासन-प्रशासन के फरमान को दर किनार कर ग्राम पंचायतों के सचिवों द्वारा शासनादेश के विपरीत मनमानी तौर पर ई-निविदाओं का प्रकाशन कराया गया है। जनपदवासियों ने शासन-प्रशासन से इस पर हस्तक्षेप की मांग किया है।

read more:https://pahaltoday.com/weavers-to-be-empowered-by-modern-technology-handloom-industry-in-nandganj-gains-new-momentum/
…..तो क्या जिम्मेदारियों से बच रहे अधिकारी !
शासनादेश के विपरीत ग्राम पंचायतों में सामग्री आपूर्ति के लिए प्रकाशित करायी गई ई-निविदा प्रकरण में न तो मुख्य विकास अधिकारी और न ही डीपीआरओ कुछ भी बोलने को तैयार हैं। गुरूवार को इस प्रकरण को लेकर मुख्य विकास अधिकारी के साथ ही डीपीआरओ से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन मौजूद नहीं मिली। बाद दोनों अधिकारियों के सीयूजी नंबर पर काल कर उनसे संपर्क साधने का प्रयास किया तो न तो सीडीओ और न ही डीपीआरओ ने काल रीसिव किया। लिहाजा दोनों अधिकारियों का पक्ष नहीं लिया जा सका। फोन काल न रीसिव करने की दशा में यह समझा जा रहा है कि दोनों अधिकारी अपनी जवाबदेही से बचने के लिए काल रीसिव नहीं कर रही हैं।

नाबालिग से लैंगिक उत्पीड़न के दोषी को 3 वर्ष की सजा
सोनभद्र। वर्ष 2019 में नाबालिग बालिका के साथ लैंगिक उत्पीड़न के मामले में विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) सोनभद्र ओमकार शुक्ला ने अभियुक्त लालबाबू को दोषी ठहराते हुए 3 वर्ष के कठोर कारावास एवं 20 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने अर्थदंड की राशि नियमानुसार पीड़िता को प्रदान किए जाने का भी आदेश दिया है।यह फैसला विशेष सत्र परीक्षण संख्या-28/2020, राज्य बनाम लालबाबू में सुनाया गया। अभियोजन के अनुसार वर्ष 2019 में बीजपुर थाना क्षेत्र के रजमिलान निवासी लालबाबू ने जंगल में एक नाबालिग बालिका के साथ अश्लील हरकत करते हुए उसका लैंगिक उत्पीड़न किया था। घटना के बाद दर्ज मुकदमे की विवेचना पूरी कर पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता, उसके परिजनों, चिकित्सक, विवेचक समेत अन्य गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद न्यायालय ने अभियुक्त को दोषसिद्ध पाया। न्यायालय ने अभियुक्त को भारतीय दंड संहिता की धारा 354-ख तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 8 के तहत दोषी करार देते हुए 3 वर्ष के कठोर कारावास और 20,000 के अर्थदंड से दंडित किया। मुकदमे में राज्य की ओर से विशेष लोक अभियोजक दिनेश प्रसाद अग्रहरी एवं नीरज कुमार सिंह ने प्रभावी पैरवी की।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *