हरिद्वार,। हरिद्वार के बिल्केश्वर महादेव मंदिर में सवर्ण समाज द्वारा यूजीसी रोल बैक की मांग को लेकर आयोजित बैठक में आगामी छह सितंबर को बहादराबाद में होने वाले विशाल सम्मेलन को लेकर समाज के लोगों में जोश दिखाई दिया। सभा को संबोधित करते हुए स्वामी आनंद स्वरूप ने आंदोलन को राजनीतिक रंग नहीं देने की अपील करते हुए इसे देश में समानता और अधिकारों की लड़ाई बताया। उन्होंने कहा कि 75 साल बाद भी जाति की जंजीरों में क्यों जकड़ा है देश?स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा कि “यह आंदोलन किसी राजनीतिक पार्टी का आंदोलन नहीं है। यह आंदोलन हमारे हक के लिए है, हमारे भविष्य के लिए है और देश के भविष्य के लिए है।” उन्होंने कहा कि आने वाला समय ऐसा नहीं होना चाहिए जिसमें देश जातिगत टकराव और हिंसा की ओर बढ़े। यदि देश को मजबूत बनाना है तो जातिवाद की दीवारों को कमजोर करना होगा और समानता के प्रश्न पर गंभीर चर्चा करनी होगी। उन्होंने कहा कि आजादी के 75 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद देश में समानता के सवाल पर गंभीरता से विचार नहीं हुआ।read more:https://pahaltoday.com/woman-posing-as-a-bride-flees-after-administering-a-sedative-remains-at-large-even-after-a-month-and-a-half/उन्होंने संविधान में आरक्षण की व्यवस्था और उसकी अवधि का उल्लेख करते हुए कहा कि आरक्षण को लेकर देश में व्यापक और निष्पक्ष चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने संबोधन में डॉ. भीमराव अंबेडकर का भी उल्लेख किया और कहा कि आरक्षण को लेकर उस समय भी एक निश्चित अवधि और व्यवस्था की कल्पना की गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि “जब दशकों बीत गए हैं तो क्या अब देश को यह विचार नहीं करना चाहिए कि आरक्षण का आधार जाति के बजाय वास्तविक आवश्यकता और आर्थिक कमजोरी हो? उन्होंने कहा कि उनका सवाल किसी जाति के खिलाफ नहीं है। गरीब चाहे किसी भी जाति, समुदाय या वर्ग का हो, उसे अवसर और सहायता मिलनी चाहिए। लेकिन यदि कोई व्यक्ति केवल जन्म के आधार पर किसी व्यवस्था का लाभ या नुकसान उठाता रहे तो इससे सामाजिक असंतोष पैदा हो सकता है। सभा में उन्होंने कहा कि स्वर्ण समाज को किसी के अधिकार छीनने की लड़ाई नहीं लड़नी है, बल्कि समान अवसर और न्यायपूर्ण व्यवस्था की मांग करनी है। उन्होंने कहा कि समाज को अपनी बात शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से सरकार तथा देश के सामने रखनी चाहिए।स्वामी आनंद स्वरूप ने उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि छह सितंबर को बहादराबाद में आयोजित होने वाले विशाल सम्मेलन में भारी संख्या में पहुंचें और अपनी एकजुटता का परिचय दें। उन्होंने कहा कि यदि समाज अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर गंभीर है तो उसे संगठित होकर अपनी आवाज लोकतांत्रिक तरीके से उठानी होगी। इस मौके पर काफी संख्या में साधु संत और अन्य व्यक्ति मौजूद थे।