अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के निदेशक प्रो. दिनेश प्रसाद सकलानी को एनसीईआरटी डॉक्टोरल फेलोशिप के भुगतान में हो रही देरी के संबंध में ज्ञापन सौंप सात माह से लंबित फेलोशिप का तत्काल भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की है। फेलोशिप पर निर्भर अनेक शोधार्थियों के लिए इसके लंबे समय से लंबित रहने के कारण शोध, शैक्षणिक कार्यों तथा आवश्यक खर्चों के प्रबंधन में कठिनाइयां उत्पन्न हो रही हैं, जिसके चलते अभाविप ने यह ज्ञापन दिया है।एनसीईआरटी डॉक्टोरल फेलोशिप का भुगतान सामान्यतः त्रैमासिक आधार पर किया जाता है, लेकिन अगस्त 2026 तक शोधार्थियों को पिछले सात माह की फेलोशिप प्राप्त नहीं हुई है। प्रभावित शोधार्थियों ने ईमेल एवं अन्य आधिकारिक माध्यमों से संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर भुगतान की स्थिति स्पष्ट करने तथा शीघ्र समाधान की मांग की लेकिन अब तक कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
read more:https://pahaltoday.com/mobile-court-visits-ballia-to-hear-grievances-of-persons-with-disabilities-state-commissioner-issues-strict-directives/अभाविप ने एनसीईआरटी से लंबित राशि का तत्काल भुगतान करने के साथ ही भविष्य में फेलोशिप के नियमित एवं समयबद्ध भुगतान के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने का आग्रह किया है, जिससे शोधार्थियों की शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियां निर्बाध रूप से जारी रह सकें।अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी ने कहा कि, “शोधार्थियों की फेलोशिप में सात माह की देरी अत्यंत गंभीर विषय है। शोधार्थी अपनी शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों के साथ-साथ आवश्यक खर्चों के लिए इस आर्थिक सहायता पर निर्भर रहते हैं। फेलोशिप के समय पर न मिलने से न केवल उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, बल्कि उनके शोध कार्य की निरंतरता भी प्रभावित होती है। शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने वाली संस्थाओं से यह अपेक्षा की जाती है कि वे शोधार्थियों को आवश्यक सहयोग समय पर उपलब्ध कराएं। अभाविप ने एनसीईआरटी से मांग की है कि लंबित फेलोशिप का बिना किसी और विलंब के तत्काल भुगतान किया जाए तथा भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्पष्ट, पारदर्शी और समयबद्ध भुगतान व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। शोधार्थियों को अपनी मूलभूत आवश्यकताओं और फेलोशिप के भुगतान को लेकर अनिश्चितता में रखना उचित नहीं है। हमें विश्वास है कि एनसीईआरटी इस विषय की गंभीरता को समझते हुए शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई करेगा और शोधार्थियों को राहत प्रदान करेगा।”