नगीना । विगत दिवस पर्वतीय एवं मैदानी क्षेत्रों में अत्यधिक बर्षा होने से खो नदी का जलस्तर बढ़ने से तहसील नगीना के विकास खण्ड कोतवाली के अन्तर्गत ग्राम भोगली के समीप खो नदी के दायें किनारे पर स्थित प्राचीन प्रकटेश्वर शिव मन्दिर परिसर तक खो नदी का जल पहुँच गया। गौरतलब है कि यह शिव मन्दिर क्षेत्र के लोगों का आस्था का केंद्र है । प्रत्येक सोमवार एवं श्रावण मास आदि प्रमुख अवसरों पर यहाँ श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है । क्षेत्रवासियों द्वारा मन्दिर की सुरक्षा हेतु की गई अपील पर अधिशासी अभियंता अफजलगढ सिंचाई खण्ड धामपुर अरूण सचदेवा ने अपनी टीम के साथ मन्दिर परिसर का जायजा लिया तथा अधीनस्थों को मन्दिर की सुरक्षा हेतु समुचित कार्यवाही करने का निर्देश दिया। इस दौरान सहायक अभियंता नगीना उपखण्ड आकांक्षा रावत, जू.इं. देवेन्द्र कुमार शर्मा, चन्द्रकुश चौहान एवं अन्य विभागीय कार्मिक मौजूद रहे।
1.80 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से बिजनौर में अलर्ट
बिजनौर। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही भारी बारिश और हरिद्वार बैराज से गंगा में 1.80 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद बिजनौर में प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। गंगा और खोह नदी का जलस्तर बढ़ने से चांदपुर और बिजनौर तहसील क्षेत्र के करीब 11 गांवों की कृषि भूमि में जलभराव हुआ है। हालांकि आबादी क्षेत्र फिलहाल सुरक्षित है और जनजीवन सामान्य बना हुआ है।जिलाधिकारी जसजीत कौर ने प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर अधिकारियों को बाढ़ चौकियों को 24 घंटे सक्रिय रखने तथा प्रभावित लोगों को तत्काल राहत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में घर-घर जाकर स्वास्थ्य जांच करने के भी निर्देश दिए।read more:https://pahaltoday.com/ballia-police-receive-two-modern-interceptor-bikes-sp-omvir-singh-flags-them-off/
बढ़ापुर में कटान की आशंका
खोह नदी का जलस्तर बढ़ने से नगीना तहसील के बढ़ापुर क्षेत्र में कटान की आशंका को देखते हुए डीएम ने सिंचाई, वन विभाग, तहसील और पुलिस अधिकारियों के साथ मौके का निरीक्षण किया। उन्होंने कटान रोकने के तकनीकी उपाय करने और नदी किनारे रहने वाली आबादी की सूची तैयार रखने के निर्देश दिए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर लोगों को तत्काल बाढ़ आश्रय स्थलों में पहुंचाया जा सके। अधिकारियों के अनुसार खोह नदी का जलस्तर अब धीरे-धीरे कम हो रहा है।
चार राहत चौकियां और दो नावें तैनात
चांदपुर तहसील के जलीलपुर ब्लॉक क्षेत्र के दतियाना, रायपुर खादर और मीरापुर सीकरी के संपर्क मार्गों पर करीब एक से डेढ़ फीट पानी आने से आवागमन प्रभावित हुआ है, लेकिन गांवों का संपर्क नहीं टूटा है। ग्रामीण ट्रैक्टरों से आवागमन कर रहे हैं। एसडीएम प्रशांत वर्मा की निगरानी में 10 और 25 सीटर क्षमता की दो नावें तैनात की गई हैं। चार बाढ़ राहत चौकियों पर राजस्व कर्मियों की रोस्टरवार ड्यूटी लगाई गई है।
300 राशन किट बांटीं
प्रभावित 11 गांवों में जनप्रतिनिधियों के माध्यम से करीब 300 राशन किट वितरित की जा चुकी हैं। अतिरिक्त राहत सामग्री का भी बफर स्टॉक तैयार रखा गया है। सुरक्षा के लिए फ्लड पीएसी तैनात है और एसडीआरएफ व एनडीआरएफ के साथ समन्वय बनाए रखा गया है। स्वास्थ्य एवं पशुपालन विभाग की टीमें भी प्रभावित क्षेत्रों में दवाओं के वितरण, कीटनाशक छिड़काव और पशुओं के टीकाकरण में जुटी हैं।
पानी उतरने के बाद होगा फसल नुकसान का सर्वे
गंगा का पानी खेतों में आने से गन्ने की फसलों को हुए नुकसान का आकलन पानी उतरने के बाद किया जाएगा। राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीमें स्थलीय सर्वे करेंगी। फसल में 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान पाए जाने पर शासन की दैवीय आपदा नियमावली के तहत पात्र किसानों को आर्थिक मुआवजा दिया जाएगा।
32 बाढ़ चौकियां और 35 आश्रय स्थल सक्रिय
जिला आपदा प्रबंधक प्रशांत सक्सेना के अनुसार जिले में 32 बाढ़ चौकियां और 35 बाढ़ आश्रय स्थल सक्रिय किए गए हैं। जिले में 24 संवेदनशील और पांच अति संवेदनशील क्षेत्र चिह्नित हैं। गंगा और खोह नदी पर गेज स्थापित कर जलस्तर की 24 घंटे निगरानी की जा रही है। मालन नदी के जलस्तर पर भी नजर रखी जा रही है।
हर दो घंटे में मिल रहा वेदर अपडेट
जिला कंट्रोल रूम से हर दो घंटे में एसडीएम, तहसीलदार, बीडीओ, ईओ, तटीय ग्राम प्रधानों और आपदा मित्रों को मौसम एवं बाढ़ की स्थिति की जानकारी देकर अलर्ट किया जा रहा है। ‘सचेत ऐप’ के माध्यम से दो से तीन घंटे पहले मौसम संबंधी अलर्ट मिलने से प्रशासन को समय रहते तैयारियां करने में मदद मिल रही है। ग्राम स्तर पर चौपाल लगाकर ग्रामीणों को भी जागरूक किया जा रहा है। तहसीलवार बाढ़ सुरक्षा उपकरण वितरित किए जा चुके हैं तथा नाव, नाविक और गोताखोरों का चिन्हीकरण भी पूरा कर लिया गया है।