गाजीपुर, नगवा चौकिया। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर जनपद गाजीपुर के नगवा चौकिया स्थित जय गुरुबंदे सत्संग स्थल पर परम संत जय गुरुबंदे जी महाराज द्वारा भव्य और दिव्य सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जय गुरुबंदे स्वर योग साधना के मीडिया प्रभारी शशि दास ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करके बताएं कि – सुबह से ही सत्संग स्थल पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। गाजीपुर, बलिया, वाराणसी, आजमगढ़, मिर्जापुर सहित पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और भक्ति व ज्ञान का लाभ लिया। पूरे परिसर में “जय गुरुबंदे” और “जय श्री कृष्ण” के जयकारों से भक्तिमय माहौल बन गया। भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया।सत्संग को संबोधित करते हुए परम संत जय गुरुबंदे जी महाराज ने कहा कि मनुष्य की सबसे बड़ी भूल यह है कि वह केवल दुख में ही भगवान को याद करता है। सच्चा भक्त वह है जो सुख में भी परमात्मा को न भूले। उन्होंने कहा कि यदि सुख में भगवान को याद करना शुरू कर दिया तो भगवान मिले या न मिले, भगवान की याद हमेशा बनी रहेगी और यदि याद बनी रही तो जीवन में कभी पतन नहीं होगा। कामना युक्त होकर किया गया कोई भी कार्य कभी सफल नहीं होता, इसलिए भक्ति हमेशा निष्काम होनी चाहिए।स्वामी जी ने कहे कि भक्ति का प्रथम नियम – अवगुणों का त्याग होता है। भक्ति करवाने वाला गुरु और करने वाला शिष्य दोनों का सुंदर और शुभ होना जरूरी है। केवल पूजा-पाठ करवा लेना भक्ति नहीं है। जब तक जीवन में पाप बढ़ाने वाले कार्यों और अवगुणों का त्याग नहीं होगा, तब तक केवल भगवान का नाम लेने से पाप नहीं रुक सकता। इसलिए भक्ति का सर्वप्रथम नियम अवगुणों का त्याग है।
इस भाव को उन्होंने अपने दोहों के माध्यम से समझाया –
*किया जो भक्ति तर गया, हुआ पाप का अंत।*
*भक्ति दाता जय गुरुबंदे, कहते जग में संत।।*
अतः हमें भक्ति से अपने मन के मंदिर की भी सफाई करनी चाहिए। आरती के समय जो भाव एक सच्चे भक्त में होता है, वही भाव जीवन भर बनाए रखना चाहिए। प्रेम ही उद्धार का मार्ग हैं।प्रेम की महिमा बताते हुए स्वामी जी ने कहा –
*तारे पापी पतित को प्रेम का पाठ पढ़ाएं।*
*जानो गुरु गुण जय गुरुबंदे, देते स्वयं जनाएं।*
प्रेम ही वह शक्ति है जो बड़े से बड़े पापी और पतित का भी उद्धार कर सकती है। इंसान नेक कर्म से अमर होता है । उन्होंने जीवन में बदलाव लाने का आह्वान किया । सच्चे मन से सेवा और सत्संग किया, उसे निज ज्ञान की प्राप्ति हुई है और नेक कर्म करने वाला व्यक्ति ही इस संसार में अमर होता है। कार्यक्रम का समापन भजन-कीर्तन, महाआरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।