किरतपुर। दसलक्षण पर्व के पावन अवसर पर श्री आदिनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में धार्मिक अनुष्ठानों और भक्ति का सिलसिला लगातार जारी है। पर्व के चौथे दिन श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर जी में ‘उत्तम शौच धर्म’ की विशेष पूजा-अर्चना पूरे विधि-विधान और हर्षोल्लास के साथ की गई।इससे पूर्व, मंदिर जी में सुबह सर्वप्रथम भगवान का अभिषेक और पावन शांतिधारा संपन्न हुई। इसके पश्चात श्रद्धालुओं ने नित्य नियम पूजा करने के बाद समाज के लोगों के साथ मिलकर उत्तम शौच धर्म की सामूहिक पूजा की और भगवान को अर्घ्य समर्पित किए।
इस अवसर पर आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने उत्तम शौच धर्म का महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि शौच धर्म का अर्थ केवल बाहरी शारीरिक सफाई नहीं, बल्कि मन की पवित्रता है।
read more:https://pahaltoday.com/manveer-singh-arrested-near-nepal-border-sent-to-punjab-under-tight-security/ अपने जीवन से लोभ, लालच, ईर्ष्या और तृष्णा जैसी बुराइयों का त्याग करना ही सच्चा उत्तम शौच धर्म है। जो व्यक्ति संतोष धारण करता है और अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखता है, वही जीवन में सच्ची शांति और आत्मिक सुख प्राप्त कर सकता है। सुखी और शांत जीवन के लिए मन का निष्कपट और लोभ-रहित होना बेहद जरूरी है।कार्यक्रम के दौरान सुरेंद्र जैन,अनिल जैन,अरविन्द जैन,संजय जैन सीमेंट वाले,सुनील जैन,नीरज जैन,यतेंद्र जैन,रोहित जैन,प्रदीप जैन,कमल जैन, अविनाश जैन,अभिषेक जैन, आकाश जैन,गौरव जैन,अंकुर जैन,हनी जैन,सविता जैन,बबीता जैन,रजनी जैन, शालिनी जैन,नीलम जैन,कुमकुम जैन,नैंसी जैन,मंजू जैन,अंजलि जैन सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के महिला-पुरुष व श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने भक्तिभाव से धर्म लाभ अर्जित किया।