राष्ट्रमंडल खेल 2026 में दमदार प्रदर्शन के बलबूते पर 39 पदकों के साथ भारत ने चौथा स्थान हासिल किया। इस बार राष्ट्रमंडल खेलों में केवल 10 खेल शामिल थे। कुश्ती, निशानेबाजी, बैडमिंटन और हाकी जैसे खेल इसमें शामिल नहीं थे जिनमें भारत का प्रदर्शन अच्छा रहा है।खेलों के शुरू होने से पहले नहीं लग रहा था कि भारत शीर्ष पांच में जगह बना पाएगा लेकिन भारत का 122 सदस्यीय दल 13 स्वर्ण, 17 रजत और नौ कांस्य पदक लेकर लौटा, जिससे पता चलता है कि देश अन्य खेलों में भी अच्छी प्रगति कर रहा है। सात स्वर्ण पदक हरियाणा के खिलाडियों ने जीते। भारत को चौथा स्थान दिलाने में मुक्केबाजी की भूमिका अहम रही। भारतीय मुक्केबाजों ने राष्ट्रमंडल खेलों में अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए रिकार्ड सात स्वर्ण पदक और कुल मिलाकर 10 पदक हासिल किए।ग्लास्गो में गत रविवार देर रात हुए राष्ट्रमंडल खेलों के समापन समारोह में राष्ट्रमंडल खेलों का ध्वज और बैटन भारत को सौंपी गई।इसके साथ ही भारत ने दुनिया को अहमदाबाद आने का एक शानदार न्योता दिया। अहमदाबाद में होने वाले 2030 राष्ट्रमंडल खेल भारत के लिए सिर्फ पदक जीतने का मंच नहीं होंगे, बल्कि 2036 ओलिंपिक की मेजबानी के सपने की सबसे बड़ी परीक्षा होंगे। दिल्ली में 2010 के बाद दूसरी बार इन खेलों की मेजबानी करने वाला भारत अहमदाबाद के जरिए दुनिया को अपनी खेल, तकनीकी और आधारभूत ढांचे की क्षमता दिखाना चाहेगा। 2030 में इन खेलों की वापसी और कबड्डी, खो-खो, योगासन व मलखंब जैसे भारतीय खेलों के संभावित समावेश से भारत पदक तालिका में शीर्ष स्थान के लिए चुनौती दे सकता है। लेकिन असली कसौटी पदक नहीं होगी। बेहतर स्टेडियम, परिवहन, प्रशिक्षण केंद्र और उनका खेलों के बाद प्रभावी उपयोग ही तय करेगा कि भारत 2036 ओलिंपिक की मेजबानी के लिए वास्तव में कितना तैयार है।read more:https://pahaltoday.com/jan-adhikar-party-demands-caste-census-and-other-measures/ गौरतलब है कि पिछले महीने केंद्रीय मंत्रिमंडल नेस्वतंत्रता के बाद का सबसे महत्वाकांक्षी खेल विकास कार्यक्रम बताते हुए ‘खेलो इंडिया’ योजना के विस्तार और राष्ट्रीय खेल महासंघों को दी जाने वाली सहायता (एएनएसएफ) के बजट के लिए अगले पांच वर्षों कुल 36,441 करोड़ रुपए के खर्च को मंजूरी दी।सरकार ने ‘खेलो इंडिया’ योजना के लिए अगले पांच वर्षों में 29,054 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। योजना का उद्देश्य जमीनी स्तर पर प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें तैयार करना है, ताकि भारत 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी और 2036 ओलंपिक की मेजबानी की दावेदारी के माध्यम से वैश्विक खेल केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ सके। सरकारी बयान में कहा गया कि स्वीकृत बजट पिछले खेलो इंडिया कार्यक्रम की तुलना में लगभग आठ गुना अधिक है, जो युवाओं के विकास, राष्ट्र निर्माण और भारत को वैश्विक खेल महाशक्ति बनाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। स्कूल स्तर पर खेलों को मजबूत करने के लिए सरकार ने दो नयी पहल शुरू की हैं जो खेलो इंडिया फीडर स्कूल और खेलो इंडिया उत्कृष्ट विद्यालय हैं। इनका उद्देश्य खेलों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना, प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान करना और उन्हें व्यवस्थित रूप से विकसित करना है। एएनएसएफ योजना के तहत 2026-31 की अवधि के लिए भारतीय खिलाड़ियों और टीम को कोचिंग, खेल विज्ञान, आधुनिक उपकरण, अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण एवं प्रतिस्पर्धाओं में भागीदारी, प्रशिक्षण शिविरों और विदेशी विशेषज्ञों की सेवाओं के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। सरकार ने कहा, यह ग्लोबल साउथ के देशों के साथ खेल सहयोग को भी बढ़ावा देगा। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय खिलाड़ी अब तक अगर विशेष पहचान बनाने में असफल रहे हैं तो इसका मुख्य कारण कमजोर बुनियादी ढांचा और
राष्ट्रमंडल खेलों में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
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