मिडल एज में विटामिन D और भविष्य की ब्रेन हेल्थ: एक स्टडी आधारित विश्लेषण डॉ अर्चिता महाजन

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फतेहपुर। डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर मास्टर्स डिग्री इन फूड न्यूट्रिशन एंड डाइटिशियन होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित और हिमाचल सरकार द्वारा सम्मानित और लेफ्टिनेंट गवर्नर लद्दाख श्री कविंदर गुप्ता जी द्वारा सम्मानित ने बताया कि हाल की एक 2026 की स्टडी यह संकेत देती है कि 30s और 40s में विटामिन D का स्तर, लगभग 20 साल बाद दिमागी स्वास्थ्य का एक मजबूत संकेतक हो सकता है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि यह संबंध (association) दिखाता है, न कि पूरी तरह कारण-परिणाम (cause-effect) साबित करता है। विटामिन D को आमतौर पर हड्डियों और इम्यून सिस्टम के लिए जरूरी माना जाता है, लेकिन अब रिसर्च यह भी दर्शा रही है कि इसका असर दिमाग पर पड़ता है। मस्तिष्क में विटामिन D के रिसेप्टर्स पाए जाते हैं, खासकर उन हिस्सों में जो याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता से जुड़े होते हैं। यह विटामिन सूजन (inflammation) को कम करने, न्यूरॉन्स की सुरक्षा करने और न्यूरोट्रांसमीटर को संतुलित रखने में मदद कर सकता है।
इस विषय को समर्थन देने के लिए कई महत्वपूर्ण अध्ययन सामने आए हैं। read more:https://khabarentertainment.in/saffron-flag-hoisted-at-shyama-prasads-birthplace-bjp-to-form-government-in-bengal-for-the-first-time/
 *UK Biobank स्टडी* (2022, The American Journal of Clinical Nutrition) में पाया गया कि जिन लोगों में विटामिन D की कमी थी, उनमें डिमेंशिया और स्ट्रोक का खतरा अधिक था। *Journal of Alzheimer’s Disease* (2014–2021) में प्रकाशित कई शोधों ने विटामिन D की कमी और याददाश्त में गिरावट तथा अल्ज़ाइमर के बढ़ते जोखिम के बीच संबंध दर्शाया। *Neurology जर्नल (American Academy of Neurology, 2014)* के अनुसार, जिन बुजुर्गों में विटामिन D की गंभीर कमी थी, उनमें डिमेंशिया का खतरा काफी अधिक पाया गया। इसके अलावा, 2020 में Nutrients में प्रकाशित एक systematic review ने निष्कर्ष निकाला कि कम विटामिन D स्तर का संबंध कमजोर cognitive function से है, हालांकि यह पूरी तरह कारण-परिणाम साबित नहीं करता। *Harvard Health Publishing और NIH* भी मानते हैं कि विटामिन D दिमाग के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इस क्षेत्र में अभी और लंबे समय के क्लिनिकल ट्रायल्स की आवश्यकता है।स्टडी में लोगों को लगभग दो दशकों तक ट्रैक किया गया और पाया गया कि जिन लोगों में मिडल एज के दौरान विटामिन D की कमी थी, उनमें आगे चलकर याददाश्त में गिरावट, सोचने की गति में कमी और न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों का जोखिम अधिक था। इसके विपरीत, जिनका विटामिन D स्तर पर्याप्त था, उनकी दिमागी कार्यक्षमता बेहतर बनी रही। यह विषय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आजकल विटामिन D की कमी बहुत आम हो गई है, खासकर शहरी जीवनशैली, कम धूप में रहना और आहार में कमी के कारण, जो भारत जैसे देशों में और भी स्पष्ट रूप से देखा जाता है।विटामिन D का प्रमुख स्रोत धूप है, जबकि आहार में फैटी फिश, अंडे की जर्दी और फोर्टिफाइड दूध जैसे विकल्प मदद कर सकते हैं। कुछ मामलों में सप्लीमेंट्स की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन डॉक्टर की सलाह के बिना इन्हें लेना उचित नहीं है, क्योंकि अधिक मात्रा नुकसानदायक हो सकती है। अंततः, यह मानना सही नहीं होगा कि केवल विटामिन D ही दिमागी स्वास्थ्य को पूरी तरह सुरक्षित रख सकता है। ब्रेन हेल्थ कई कारकों पर निर्भर करती है—जैसे नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और हृदय की अच्छी सेहत।

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