लोकतंत्र में विरोध के नाम पर हिंसा स्वीकार नहीं की जा सकती

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नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के सरकारी आवास के बाहर पुतला जलाने के मामले में आरोपितों को राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध के नाम पर हिंसा स्वीकार नहीं की जा सकती। कोर्ट ने आरोपितों की आरोपमुक्त किए जाने की याचिका खारिज करते हुए उनकी कार्रवाई को बेहद विघटनकारी गतिविधि करार दिया। न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया ने कहा कि आरोपित जगदीप सिंह उर्फ जग्गा और अन्य लोगों ने केवल सड़क पर पुतला नहीं जलाया, बल्कि सुरक्षा कर्मियों के विरोध के बावजूद सड़क, फुटपाथ और सर्विस लेन पार कर जलते हुए हिस्सों को सुरक्षा कक्ष की छत पर फेंका। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की हरकत को विरोध प्रदर्शन नहीं कहा जा सकता। अभियोजन के मुताबिक 21 जून 2022 को जेपी नड्डा के सरकारी आवास के बाहर आरोपित एकत्र हुए थे। उन्होंने नारेबाजी की और पुतला जलाया।read more:https://pahaltoday.com/a-joint-police-team-of-ahraura-police-station-and-sogsurveillance-recovered-1075-bottles-of-illicit-english-liquor-from-03-four-wheelers/आरोप है कि आरोपित जलते हुए पुतले को लकड़ी की मदद से उठाकर गेट और सुरक्षा कक्ष की छत की ओर फेंककर मौके से फरार हो गए। पूरी घटना सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई, जिसकी फुटेज चार्जशीट का हिस्सा है। आरोपितों की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि घटना में किसी को चोट नहीं लगी और किसी की हत्या करने का इरादा भी नहीं था, इसलिए हत्या के प्रयास की धारा लागू नहीं होती है।

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