नई दिल्ली,। डॉ भीमराव अम्बेडकर कॉलेज में विश्वविद्यालय छात्र संघ व अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, यमुना विहार जिला के संयुक्त तत्वावधान में ‘युवती सम्मेलन-26 स्वयंसिद्धा’ का आयोजन किया जा रहा है। सम्मेलन की तिथि एवं स्थान की घोषणा शीघ्र की जाएगी। कार्यक्रम की मूल भावना नारी संगम और उत्सव शक्ति को केंद्र में रखते हुए युवतियों की प्रतिभा, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक सहभागिता और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर संवाद स्थापित किया जाएगा।स्वयंसिद्धा नाम अपने आप में उस विचार को अभिव्यक्त करता है, जिसमें नारी को केवल उपलब्ध अवसरों की सहभागी नहीं, बल्कि अपनी क्षमता, निर्णय और संकल्प के बल पर स्वयं अपना मार्ग निर्धारित करने वाली शक्ति के रूप में देखा जाता है।वर्तमान समय में शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन, उद्यमिता, कला, खेल, सामाजिक सेवा और सार्वजनिक जीवन सहित अनेक क्षेत्रों में युवतियों की बढ़ती भागीदारी भारतीय समाज में सकारात्मक परिवर्तन का परिचायक है। इसी व्यापक परिवर्तन को विचार और संवाद का आधार बनाते हुए सम्मेलन युवतियों के भीतर छिपी संभावनाओं को पहचानने तथा उन्हें सार्थक दिशा देने का प्रयास करेगा।कार्यक्रम का उद्देश्य युवतियों में यह विश्वास मजबूत करना है कि नेतृत्व केवल पद प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने की क्षमता है। जिससे युवतियों को अपने विचार निर्भीकता के साथ रखने, चुनौतियों का विवेकपूर्ण सामना करने, उपलब्ध संसाधनों का सदुपयोग करने और सामाजिक सरोकारों के प्रति संवेदनशील बनने के लिए प्रेरित करना सम्मेलन की महत्वपूर्ण भावना होगी। इस सम्मेलन के विषय को लेकर डॉ भीमराव अम्बेडकर महाविद्यालय के अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के कार्यकर्ता उत्कर्ष तिवारी ने कहा कि भारतीय युवतियों में प्रतिभा और सामर्थ्य की कोई कमी नहीं है।read more:https://pahaltoday.com/district-magistrate-holds-meeting-of-the-district-drinking-water-and-sanitation-mission-issues-directives/आवश्यकता केवल ऐसे मंचों की है जहां उन्हें अपने विचार व्यक्त करने, अनुभव साझा करने और भविष्य की संभावनाओं पर विमर्श करने का अवसर मिल सके। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास से युक्त और सामाजिक दायित्वों के प्रति सजग युवा पीढ़ी ही भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।इसके साथ ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के कार्यकर्ता दक्ष त्रिवेदी ने कहा कि ‘स्वयंसिद्धा’ का संदेश युवतियों को अपनी क्षमताओं को पहचानने और उन्हें सकारात्मक उद्देश्य के साथ आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है। उनके अनुसार आधुनिक भारत की प्रगति में महिलाओं की भागीदारी अब केवल आवश्यकता नहीं, बल्कि विकास की अनिवार्य शर्त बन चुकी है। जब महिलाएं शिक्षा, नवाचार, सामाजिक सेवा और नेतृत्व के क्षेत्र में आगे आती है, तब उसका प्रभाव पूरे समाज पर दिखाई देता है।वहीं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के इकाई उपाध्यक्ष ऋषि सिंह ने कहा कि नारी शक्ति भारतीय सभ्यता और सामाजिक संरचना की महत्वपूर्ण आधारशिला रही है। आज आवश्यकता इस बात की है कि युवतियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझने का अवसर मिले। उन्होंने कहा कि ‘स्वयंसिद्धा’ जैसी पहल संवाद, जागरूकता और सकारात्मक चिंतन को आगे बढ़ाने का माध्यम बन सकती है।सम्मेलन के माध्यम से युवतियों के बीच आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास, नेतृत्व, सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी जैसे विषयों को प्रमुखता से सामने लाने का प्रयास किया जाएगा। यह आयोजन युवतियों की उपलब्धियों का उत्सव मनाने के साथ-साथ उनके सामने मौजूद संभावनाओं और भविष्य की चुनौतियों पर विचार करने का अवसर भी प्रदान करेगा।‘युवती सम्मेलन-26 स्वयंसिद्धा’ का व्यापक संदेश यही है कि सशक्त समाज की कल्पना सशक्त युवती चेतना के बिना संभव नहीं और उस चेतना में नारी की भागीदारी निर्णायक है। सम्मेलन युवतियों को अपनी पहचान, प्रतिभा और संकल्प को नई दिशा देने के साथ राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करने वाला सार्थक मंच बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।