नियमित योगाभ्यास से शरीर और मन के बीच सामंजस्य स्थापित होकर खिलाड़ीयों की कार्यक्षमता और मानसिक दृढ़ता में वृद्धि होती है।: अभिषेक कुमार सिंह                       

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गाजीपुर। पी० जी० कॉलेज गाजीपुर में पूर्व शोध प्रबन्ध प्रस्तुत संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी महाविद्यालय के अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ तथा विभागीय शोध समिति के तत्वावधान में महाविद्यालय के सेमिनार हाल में सम्पन्न हुई, जिसमें महाविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी व छात्र- छात्राएं उपस्थित रहे। उक्त संगोष्ठी में विज्ञान संकाय के शारीरिक शिक्षा एवं खेलकूद विषय के शोधार्थी अभिषेक कुमार सिंह ने अपने शोध प्रबन्ध शीर्षक “खिलाड़ियों की मनोवृत्ति पर आसन व प्राणायाम के प्रभाव का अध्ययन” नामक विषय पर शोध प्रबन्ध व उसकी विषय वस्तु प्रस्तुत करते हुए कहा कि आसन एवं प्राणायाम खिलाड़ियों के मानसिक एवं शारीरिक विकास के प्रभावी साधन हैं। नियमित अभ्यास से आत्मविश्वास, एकाग्रता, मानसिक संतुलन, सकारात्मक मनोवृत्ति तथा खेल प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार होता है। इसलिए खेल प्रशिक्षण कार्यक्रमों में योग को नियमित रूप से शामिल किया जाना चाहिए। प्रस्तुत शोध “खिलाड़ियों के मनोवृत्ति पर आसन एवं प्राणायाम के प्रभाव का अध्ययन” विषय पर आधारित है। शोध के निष्कर्ष से पता चलता है कि बालक एवं बालिका खिलाड़ियों के मनोवृत्ति पर आसन एवं प्राणायाम के प्रभाव में सार्थकता देखने को मिली कोई महत्वपूर्ण अन्तर देखने को नहीं मिला था। शासकीय, वित्तपोषित, स्ववित्त पोषित महाविद्यालयों में अध्ययनरत खिलाड़ियों के मनोवृत्ति पर आसन एवं प्राणायाम के प्रभाव में महत्वपूर्ण अन्तर देखने को मिला था। ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के खिलाड़ियों के मनोवृत्ति पर आसन एवं प्राणायाम के प्रभाव में सार्थकता पाई गई है, जिसके कारण महत्वपूर्ण अन्तर देखने को नहीं मिला था। आर्थिक स्थिति के आधार गरीब वर्ग, मध्य वर्ग और धनी वर्ग के खिलाड़ियों के मनोवृत्ति पर आसन एवं प्राणायाम के प्रभाव में बहुत अधिक भिन्नता देखने को मिलती है, इसी कारण इनमें महत्वपूर्ण अन्तर देखने को मिला है। आसन एवं प्राणायाम का प्रतिदिन अभ्यास करने वाले और अभ्यास नहीं करने वाले खिलाड़ियों के मनोवृत्ति पर आसन एवं प्राणायाम के प्रभाव में महत्वपूर्ण अन्तर प्राप्त नहीं हुए इन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा और सार्थकता प्राप्त हुई है। इस शोध की नवीनता इस तथ्य में निहित है कि इसमें योग के दो प्रमुख आयामों-आसन एवं प्राणायाम का खिलाड़ियों की मनोवृत्ति (Attitude) पर संयुक्त प्रभाव का वैज्ञानिक अध्ययन किया गया है। अधिकांश पूर्ववर्ती शोध शारीरिक क्षमता, स्वास्थ्य अथवा प्रदर्शन पर केंद्रित रहे हैं, जबकि वर्तमान अध्ययन खिलाड़ियों के मनोवैज्ञानिक पक्ष को विशेष रूप से केंद्र में रखता है। यह शोध खिलाड़ियों में सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास, मानसिक संतुलन, एकाग्रता, अनुशासन तथा खेल के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में आसन एवं प्राणायाम की भूमिका का विश्लेषण प्रस्तुत करता है।read more:https://khabarentertainment.in/cunning-man-arrested-for-pressuring-woman-into-marriage-through-blackmail/ अध्ययन के परिणाम खेल प्रशिक्षण में योग को एक प्रभावी मनोवैज्ञानिक हस्तक्षेप (Psychological Intervention) के रूप में स्थापित करने में सहायक होंगे। इस शोध का प्रमुख योगदान यह है कि यह खेल प्रशिक्षकों, शारीरिक शिक्षा के शिक्षकों, खेल मनोवैज्ञानिकों तथा खिलाड़ियों को प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नियमित रूप से आसन एवं प्राणायाम को सम्मिलित करने हेतु वैज्ञानिक आधार प्रदान करेगा। साथ ही, यह अध्ययन खेल विज्ञान, योग शिक्षा तथा शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्ध साहित्य को समृद्ध करेगा और भविष्य में इस विषय पर होने वाले अनुसंधानों लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री उपलब्ध कराएगा। अतः यह शोध न केवल खिलाड़ियों के मानसिक एवं व्यवहारिक विकास की दिशा में एक नवीन प्रयास है, बल्कि खेल प्रदर्शन को अप्रत्यक्ष रूप से बेहतर बनाने तथा योग आधारित प्रशिक्षण पद्धति को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण प्रस्तुतिकरण के बाद विभागीय शोध समिति, अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ व प्राध्यापकों तथा शोध छात्र-छात्राओं द्वारा शोध पर विभिन्न प्रकार के प्रश्न पूछे गए जिनका शोधार्थी अभिषेक कुमार सिंह ने संतुष्टिपूर्ण एवं उचित उत्तर दिया। तत्पश्चात समिति चेयरमैन एवं महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफे०(डॉ०) राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने शोध प्रबंध को विश्वविद्यालय में जमा करने की संस्तुति प्रदान किया। इस संगोष्ठी में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफे० (डॉ०) राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय, अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ के संयोजक प्रोफे० (डॉ०) जी० सिंह, शोध निर्देशक डॉ० ओमदेव सिंह गौतम, शारीरिक शिक्षा एवं खेलकूद विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफे० (डॉ०) वीरेंद्र कुमार सिंह डॉ० लवजी सिंह, प्रोफे० (डॉ०) सुजीत कुमार सिंह, डॉ० अनुराग सिंह, प्रोफे०(डॉ०) अरुण कुमार यादव, डॉ० रामदुलारे, डॉ० अशोक कुमार, डॉ० रविशेखर सिंह, प्रोफे० (डॉ०) संजय चतुर्वेदी, डॉ० योगेश कुमार, डॉ०शिवशंकर यादव, प्रदीप सिंह,  एवं महाविद्यालय के प्राध्यापकगण तथा शोध छात्र छात्रएं आदि उपस्थित रहे। अंत में  डॉ० लवजी सिंह ने सभी का आभार व्यक्त किया तथा संचालन अनुसंधान एवं विकास प्रोकोष्ठ के संयोजक प्रोफे०(डॉ०) जी० सिंह ने किया।

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