बिजनौर। गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के बीच धामपुर तहसील क्षेत्र के किसानों ने अपने हक और भविष्य की सुरक्षा को लेकर आवाज बुलंद की है। प्रभावित किसानों ने मुख्यमंत्री और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री के नाम उपजिलाधिकारी धामपुर को ज्ञापन सौंपकर उचित मुआवजा, पारदर्शी पैमाइश और किसानों की मौजूदगी में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया कराने की मांग की। डीएम की गैरमौजूदगी में किसानों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा।ग्राम गुरदासपुर, बहादरपुर, सतोनगली, दीनदारपुर, दौलताबाद, मांदयो, कृष्णा, रामपुर सहित अन्य गांवों के किसानों का कहना है कि उनकी कृषि भूमि प्रस्तावित गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित की जा रही है। किसानों ने स्पष्ट किया कि वे विकास और एक्सप्रेसवे निर्माण के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास की कीमत किसानों के भविष्य को संकट में डालकर नहीं चुकाई जानी चाहिए।
‘जमीन हमारी आजीविका, मुआवजा भी न्यायपूर्ण हो’
किसानों ने ज्ञापन में मांग की कि अधिग्रहित भूमि का मुआवजा उसकी वास्तविक बाजार कीमत को ध्यान में रखते हुए कम से कम 10 गुना दिया जाए। किसानों का कहना है कि कृषि भूमि केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि उनके परिवार की आजीविका और आने वाली पीढ़ियों का सहारा है। ऐसे में भूमि छिनने के बाद मिलने वाला मुआवजा इतना होना चाहिए कि प्रभावित परिवार अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकें।किसानों ने भूमि की पैमाइश और सीमांकन प्रक्रिया को भी पूरी तरह पारदर्शी बनाने की मांग की। उनका कहना है कि प्रत्येक किसान की मौजूदगी में पैमाइश कराई जाए और इसके लिए पहले से लिखित सूचना दी जाए, ताकि बाद में किसी तरह का विवाद या भ्रम पैदा न हो।
हर खसरे का नक्शा किसानों को देने की मांग
ज्ञापन में किसानों ने अधिग्रहित होने वाले प्रत्येक खसरे का नक्शा और पूरा विवरण उपलब्ध कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि मुआवजा निर्धारित होने से पहले किसी भी त्रुटि, आपत्ति या भूमि संबंधी विवाद का निस्तारण किया जाना चाहिए। इसके बाद ही मुआवजे की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।किसानों ने मुआवजा राशि का भुगतान भी पूरी तरह पारदर्शी तरीके से किए जाने की मांग की है। जिन किसानों की अधिकांश अथवा पूरी कृषि भूमि एक्सप्रेसवे की जद में आ रही है, उनके लिए पुनर्वास और आजीविका की सुरक्षा को लेकर विशेष योजना बनाने की मांग भी उठाई गई।
खेत दो हिस्सों में बंटे तो सिंचाई की व्यवस्था कौन करेगा?
किसानों ने एक महत्वपूर्ण समस्या की ओर भी अधिकारियों का ध्यान खींचा। उनका कहना है कि एक्सप्रेसवे निर्माण के बाद कई किसानों की भूमि सड़क के दोनों ओर छूट सकती है। ऐसे में खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाना बड़ी चुनौती बन जाएगा। किसानों ने मांग की कि ऐसे सभी खेतों के लिए पाइपलाइन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।इसके अलावा सरकारी नक्शे में दर्ज पुराने रास्तों को बंद न किया जाए। जहां एक्सप्रेसवे के कारण रास्ते बाधित हो रहे हैं, वहां अंडरपास का निर्माण कराया जाए, ताकि ग्रामीणों, किसानों और कृषि वाहनों की आवाजाही प्रभावित न हो।
किसानों ने कहा—विकास के साथ न्याय भी जरूरी
किसानों ने कहा कि वे सरकार की विकास योजनाओं के साथ हैं और एक्सप्रेसवे निर्माण में बाधा नहीं बनना चाहते। उनकी मांग केवल इतनी है कि भूमि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और किसान हित में हो। किसानों का कहना है कि यदि सरकार प्रभावित परिवारों के हितों को प्राथमिकता देती है तो इससे किसानों का सरकार के प्रति विश्वास और मजबूत होगा।ज्ञापन सौंपने वालों में अभयवीर सिंह, देसराज सिंह, गौरव कुमार,भारत सिंह, भूपेंद्र सिंह, जीवन सिंह, सत्येंद्र सिंह,प्रभात कुमार सहित बड़ी संख्या में प्रभावित किसान मौजूद रहे। किसानों ने प्रशासन से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द उचित कार्रवाई किए जाने की मांग की।