नई दिल्ली,। डॉ. भीमराव अंबेडकर महाविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा ‘हिंदी पखवाड़ा’ के अवसर पर वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस साहित्यिक एवं अकादमिक आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों के भीतर चिंतन, तर्क-वितर्क कौशल को बढ़ावा देना, उनके स्वतंत्र एवं मौलिक विचारों को मंच प्रदान करना, भाषाई समझ को गहरा करना तथा हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रति उनकी रुचि को निरंतर समृद्ध करना था प्रतियोगिता का मुख्य विषय ‘बातचीत में अपशब्द का प्रयोग अब सामान्य बात है’ रखा गया। इस विषय के अंतर्गत महाविद्यालय के विभिन्न अध्ययन पाठ्यक्रमों से आए छात्र-छात्राओं को समकालीन सामाजिक दृष्टिकोण, भाषाई मर्यादा तथा अपने व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित विचारों को पक्ष एवं विपक्ष में प्रस्तुत करने का अवसर मिला।विद्यार्थियों ने इस आयोजन में उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपने ओजस्वी विचारों का प्रदर्शन किया और अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों में विषयगत विविधता, तार्किक दृढ़ता और विचारों की स्पष्टता देखने को मिली। विद्यार्थियों ने अपने वक्तव्यों के माध्यम से सामाजिक व्यवहार, जनसंचार माध्यमों, युवाओं पर पड़ रहे प्रभाव तथा भाषाई संस्कारों जैसे अनेक प्रासंगिक पहलुओं को छुआ। भाषण के दौरान विद्यार्थियों ने अपनी भाषा-शैली, शब्द-चयन, उच्चारण, स्वर-नियंत्रण और प्रस्तुतिकरण का प्रदर्शन किया तथा संपूर्ण कार्यक्रम के दौरान निर्धारित अनुशासनात्मक एवं अकादमिक मानकों का पालन किया।read more:https://pahaltoday.com/woman-posing-as-a-bride-flees-after-administering-a-sedative-remains-at-large-even-after-a-month-and-a-half/आयोजकों के अनुसार, इस प्रकार की गतिविधियों का मुख्य ध्येय विद्यार्थियों को एक ऐसा निष्पक्ष मंच प्रदान करना है जहाँ वे बिना किसी संकोच के अपनी बात स्पष्टता और निडरता से रख सकें। ऐसे मंचों से विद्यार्थियों के कौशल में सुधार होता है, उनके सोचने और समझने की क्षमता का विस्तार होता है तथा उनके व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास संभव हो पाता है।कार्यक्रम में हिंदी विभाग के प्राध्यापक प्रो. बिजेंद्र कुमार, प्रो. शशि रानी, प्रो. चित्रारानी, डॉ. रामप्रकाश द्विवेदी, डॉ. प्रवीण झा, डॉ. राकेश कुमार पाण्डेय, डॉ. अनिल कांबले, डॉ. विनीत कुमार, डॉ. ममता और डॉ. अरविन्देश कुमार उपस्थित रहे। उन्होंने निर्णायक मंडल एवं मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हुए विद्यार्थियों के तर्क, विषय-सामग्री, शब्द-चयन और उच्चारण का सूक्ष्म अवलोकन किया तथा निष्पक्ष रूप से उनके प्रयासों का मूल्यांकन किया। कार्यक्रम के सुचारु संचालन, बेहतर समन्वय एवं कुशल व्यवस्थापन में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. सदानंद प्रसाद, संयोजिका प्रो. ममता, सह-संयोजक डॉ. विनीत कुमार, विभाग प्रभारी प्रो. बिजेन्द्र कुमार और सहयोगी डॉ. अखिलेश की सहभागिता रही। मंच संचालन समन्वय संयुक्ता एवं राम बहादुर टीम का योगदान रहा। इस अवसर पर प्राध्यापकों ने उपस्थित विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए अकादमिक अध्ययन के साथ-साथ ऐसी साहित्यिक और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में नियमित भागीदारी के महत्व पर जानकारी दी और उनका मार्गदर्शन किया। इस दौरान हिंदी विभाग के अन्य शिक्षक, गैर-शिक्षण कर्मचारी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।दर्शकों की अनुशासित उपस्थिति, सहयोगात्मक तरीके और उत्साहवर्धक माहौल के बीच संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ। प्रतियोगिता के अंतिम चरण में निर्णायक मंडल द्वारा निर्धारित मानकों, तर्क-शक्ति, भाषा और प्रस्तुति के अंकों के आधार पर परिणामों की घोषणा की गई। प्रतियोगिता में नंदिनी ने प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। विमलेश राजपूत ने द्वितीय और आलोक कुमार शर्मा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। परिणामों की औपचारिक घोषणा के बाद सभी विजेताओं और प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना की गई तथा उनका उत्साहवर्धन किया गया। अंत में आयोजक मंडल ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्राध्यापकों, कर्मचारियों, निर्णायकों और सहभागी विद्यार्थियों के प्रति धन्यवाद एवं आभार ज्ञापित किया।