इटावा-बरेली नेशनल हाईवे पर सोमवार का दिन उस वक्त मातम में बदल गया, जब एक ओवरलोड ऑटो मौत का कारण बन गया। जमापुर मोड़ के पास समृद्धि कोल्ड स्टोरेज के सामने हुए इस भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों—जिसमें 16 माह का मासूम भी शामिल है—की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि आठ अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, फर्रुखाबाद से शाहजहांपुर की ओर जा रहा ऑटो अपनी क्षमता से कई गुना अधिक सवारियां लेकर चल रहा था। जैसे ही वाहन जमापुर मोड़ के पास पहुंचा, चालक ने अचानक दिशा बदलने की कोशिश की। तभी सामने से तेज रफ्तार में आ रहे डीसीएम ट्रक से उसकी जबरदस्त टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भयानक थी कि ऑटो के परखच्चे उड़ गए और उसमें बैठे लोग दूर जा गिरे। इस दर्दनाक हादसे में सतेंद्र कुमार, उनकी पत्नी तनु और उनके 16 माह के मासूम बेटे युवराज की मौके पर ही मौत हो गई। मासूम की मौत ने हर किसी की आंखें नम कर दीं। वहीं आठ अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनमें से पांच की हालत बेहद चिंताजनक बताई जा रही है।read more:https://pahaltoday.com/elderly-man-found-injured-in-amangarh-tiger-reserve-dies/
हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने मानवता का परिचय देते हुए तुरंत राहत कार्य शुरू किया और पुलिस की मदद से ऑटो में फंसे घायलों को बाहर निकाला। घायलों को पहले सीएचसी राजेपुर और फिर डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल फर्रुखाबाद भेजा गया, जहां से गंभीर हालत में पुष्पा देवी समेत अन्य को सैफई मेडिकल हास्पिटल रेफर किया गया। दुर्घटना के चलते हाईवे पर लंबा जाम लग गया, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को हटवाया और आवागमन सुचारू कराया। घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर और पुलिस अधीक्षक आरती सिंह अस्पताल पहुंचे। उन्होंने घायलों का हाल जाना और डॉक्टरों को बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों की मौजूदगी ने पीड़ित परिवारों को कुछ हद तक सहारा दिया। पुलिस अधीक्षक आरती सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में ऑटो के ओवरलोड होने की पुष्टि हुई है। मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बताया जा रहा है कि ऑटो चालक दिलीप कुमार दुर्घटना से प्रभावित होने वाले लोगों के ही गांव का निवासी है और सभी यात्री एक पंचायत में शामिल होने जा रहे थे। लेकिन लापरवाही और जल्दबाजी ने इस यात्रा को हमेशा के लिए खत्म कर दिया। यह हादसा न सिर्फ एक परिवार की खुशियां छीन ले गया, बल्कि पूरे क्षेत्र को गहरे शोक में डुबो गया। अब सवाल यह है कि आखिर कब तक ओवरलोडिंग जैसी लापरवाही यूं ही मासूम जिंदगियां निगलती रहेगी?