ओडीओपी से बुनकरों को मिला बाजार और पहचान, जफर अंसारी के उद्यम से 60-70 लोगों को रोजगार

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बाराबंकी। “पहले हमारा हुनर बिचौलियों और सीमित बाजारों तक सिमटकर रह जाता था। मेहनत हमारी होती थी, लेकिन अपने उत्पाद को अपनी पहचान के साथ बड़े बाजार तक पहुंचाना आसान नहीं था। आज ओडीओपी योजना ने हमें पहचान भी दी है और बाजार तक पहुंच भी।” जैदपुर निवासी बुनकर एवं उद्यमी जफर अंसारी के ये शब्द जिले के पारंपरिक हथकरघा उद्योग में आए बदलाव की कहानी बयां करते हैं। जैदपुर सहित बाराबंकी के विभिन्न क्षेत्रों में बुनाई का काम कई पीढ़ियों से परिवारों की आजीविका का आधार रहा है। हुनर और मेहनत होने के बावजूद सीमित बाजार, संसाधनों की कमी और बिचौलियों पर निर्भरता के कारण बुनकरों के सामने अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने की चुनौती रहती थी। वर्ष 2018 में शुरू हुई एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत बाराबंकी के हथकरघा उत्पादों को प्रोत्साहन मिलने से इस क्षेत्र को नए बाजारों से जोड़ने का अवसर मिला। जफर अंसारी का परिवार तीन पीढ़ियों से बुनाई के पुश्तैनी कारोबार से जुड़ा है। जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र के माध्यम से ओडीओपी योजना के तहत उन्हें करीब 18 लाख रुपये का ऋण मिला। इससे उन्होंने आठ पावरलूम स्थापित किए और करीब 10 लाख रुपये के धागे की व्यवस्था कर उत्पादन बढ़ाया। उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ उनके उत्पादों की मांग भी बढ़ी। शुरुआत में कानपुर की व्यापारिक पार्टियों से ऑर्डर मिले और बाद में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता तथा गुरुग्राम जैसे बड़े बाजारों से भी मांग आने लगी। वर्ष 2020 में अमेरिका की प्रतिष्ठित कंपनी वॉलमार्ट से जुड़े एक डिजाइनर ने जफर अंसारी के कारखाने का दौरा किया। उनके उत्पादों के नमूने पसंद किए गए और इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में नए व्यावसायिक अवसरों की संभावना बनी।read more:https://pahaltoday.com/woman-posing-as-a-bride-flees-after-administering-a-sedative-remains-at-large-even-after-a-month-and-a-half/जफर के लिए यह अनुभव इस बात का प्रमाण रहा कि स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले पारंपरिक उत्पाद गुणवत्ता और डिजाइन के स्तर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी जगह बना सकते हैं। जफर अंसारी की एचएचआर हैंडलूम कंपनी के माध्यम से करीब 60 से 70 बुनकरों को रोजगार मिल रहा है। इस तरह कारोबार का विस्तार केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे जुड़े कई अन्य बुनकर परिवारों की आजीविका भी मजबूत हुई है। हाल ही में इन्वेस्ट यूपी के माध्यम से आए जापानी प्रतिनिधिमंडल के स्वागत के दौरान बाराबंकी के हथकरघा उत्पादों का स्टॉल भी लगाया गया। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने यहां के उत्पादों को सराहा। बुनकरों के लिए यह अवसर स्थानीय हथकरघा उत्पादों की बढ़ती बाजार संभावनाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा। ओडीओपी के माध्यम से मिले प्रोत्साहन के बाद बुनकरों और उद्यमियों के काम करने के तरीके में भी बदलाव आया है। अब वे बिचौलियों के बजाय सीधे बड़ी व्यापारिक इकाइयों और बाजारों से जुड़ने का प्रयास कर रहे हैं। इससे बेहतर कीमत, नए डिजाइन, उत्पादन विस्तार और रोजगार के अवसर बढ़े हैं। जफर अंसारी की कहानी बाराबंकी के बुनकर समुदाय में हो रहे बदलाव की एक मिसाल है। पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक, नए डिजाइन और बड़े बाजार से जोड़कर जिले के बुनकर अब अपने कारोबार का दायरा बढ़ा रहे हैं। जैदपुर के करघों पर बुना जाने वाला धागा अब स्थानीय बाजार से निकलकर देश के बड़े शहरों और अंतरराष्ट्रीय बाजार की संभावनाओं तक पहुंच रहा है।

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