प्रकृति जीवन-अस्तित्व का आधार है: संजय अवस्थी 

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लखनऊ। प्रकृति जीवन-अस्तित्व का आधार है जीवन जगत का सार है सृष्टि की अप्रतिम परिकल्पना प्रकृति है प्रकृति का मनमोहक सौंदर्य सृजन की उत्कृष्ट व्याख्या है। योगी जी की पाती पर उक्त उद्गार व्यक्त करते हुए संजय अवस्थी समाजसेवी ने कहा कि श्रावण माह नवसृजन और वसुधा-सौंदर्य संवर्धन संरक्षण का संदेश है
संजय अवस्थी ने कहा कि नवसृजन वसुधा-सौंदर्य वसुधा-वैभव के लिए आवश्यक है संजय अवस्थी ने कहा कि वसुधा सौंदर्य की अद्वितीयता के लिए निरन्तर नवसृजन आवश्यक है वसुधा सौंदर्य अद्वितीय है संजय अवस्थी ने कहा कि सृष्टि की उत्कृष्ट व्यवस्था का प्रतिबिंब वर्षा है जल जीवन और सृजन का आधार तत्व है वर्षा से प्रकृति और सर्जना का मूल स्वरुप संरक्षित है वर्षा से प्रकृति-सौंदर्य अपना अद्वितीय मूल स्वरुप पुनः प्राप्त करता है प्रकृति-सौंदर्य अपना वास्तविक स्वरुप वर्षा से प्राप्त करता है वसुधा अपना वास्तविक वैभव वर्षा से पुनः प्राप्त कर लेती है और संसार इस सुन्दर प्रक्रिया का साक्षात्कार करता है संसार साक्षी बनता है संजय अवस्थी ने कहा कि सृष्टि के उल्लास से एकाकार मयूर अपने नृत्य से वसुधा-सौंदर्य और वसुधा-वैभव की नूतन व्याख्या रचता है मयूर नृत्य असीम आनंदित वसुधा की अभिव्यक्ति ही तो है मयूर-नृत्य वसुधा के आनंदित स्वरुप का अतीव सुन्दर वर्णन हैमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी अपनी नई पाती में श्रावण माह को लोकमंगल, श्रम सम्मान एवं सामूहिकता का पावन पर्व लिखकर प्रारम्भ देते हैं।read more:https://pahaltoday.com/demand-to-remove-government-country-liquor-shop-villagers-stage-protest-at-the-collectorate/#google_vignette योगी जी लिखते हैं कि प्रकृति नवसृजन का संदेश देती है तथा अन्नदाता का परिश्रम हरित समृद्धि के रुप में फलीभूत होने लगता है सनातन संस्कृति में प्रकृति का यही नवोन्मेष शिव-आराधना से जुड़कर जीवन का संयम सेवा और समरसता का मार्ग दिखाता है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी लिखते हैं कि समुद्र मन्थन के समय भगवान शिव द्वारा हलाहल का पान सृष्टि की रक्षा हेतु किए गए सर्वोच्च त्याग का प्रतीक है उन्हें जल अर्पित करने की परम्परा उसी त्याग, कृतज्ञता और जनकल्याण के भाव की अभिव्यक्ति है उनकी जटाओं में प्रवाहित गंगा, मस्तक पर सुशोभित चंद्रमा, कंठ का सर्प, नन्दी जी और उनके गण हमें प्रकृति के साथ सहअस्तित्व का संदेश देते हैं मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ जी आगे लिखते हैं कि श्रावण में ग्रामीण क्षेत्रों में धान की रोपाई के पश्चात सामूहिक श्रम से जुड़े लोगों का सहभोज साझा संस्कृति का जीवंत प्रतीक है नई पाती में यह उल्लेख किया गया है कि प्रदेश में लगभग 20 हजार अमृत सरोवर विकसित किए जा चुके हैं जो जल संरक्षण के प्रति हमारे संकल्प का प्रमाण है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी यह भी लिखते हैं कि प्रकृति से जितना लें, उतना ही उसे लौटाने का संकल्प भी होना चाहिए
श्रावण माह को सेवा, स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और सामाजिक सहभागिता का माह बनाने का संकल्प लें प्रत्येक बूंद का सम्मान तथा प्रत्येक पौधे का संरक्षण करें यही श्रावण का वास्तविक संदेश है और समृद्ध, सुरक्षित तथा विकसित उत्तर प्रदेश की आधारशिला है संजय अवस्थी ने नई पाती को बहुत सुन्दर और प्रेरक बताया संजय अवस्थी ने कहा कि पाती सर्जना के विविध आयामों से सुसज्जित है पाती समाज में नवीन उर्जा का संचार करेगी और व्यापक जागरूकता लाएगी।

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