हिंदी को सहज कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनाएं: प्रभाकर राव

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बीना, सोनभद्र। एनटीपीसी सिंगरौली में हिंदी पखवाड़ा-2026 के तहत राजभाषा हिंदी के प्रभावी कार्यान्वयन और कार्यालयीन कार्यों में इसके सहज प्रयोग को लेकर सोमवार को विशेष हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया। दो सत्रों में आयोजित कार्यशाला में राजभाषा नीति के व्यावहारिक पक्ष, कार्यालयीन हिंदी के प्रयोग तथा बदलते तकनीकी परिवेश में हिंदी की संभावनाओं पर चर्चा की गई।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एनटीपीसी सिंगरौली के कार्यकारी निदेशक एवं परियोजना प्रमुख प्रभाकर राव रहे। विशिष्ट अतिथि एवं मुख्य वक्ता डॉ. राजेंद्र प्रसाद मिश्र, अपर निजी सचिव, भारत के राष्ट्रपति रहे। डॉ. मिश्र ने अपने संबोधन में राजभाषा हिंदी की संवैधानिक पृष्ठभूमि और सरकारी कार्यालयों में इसके प्रभावी प्रयोग के व्यावहारिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिंदी के प्रचार-प्रसार का सबसे प्रभावी माध्यम उसका सरल, सहज और निरंतर प्रयोग है। कार्यालयीन हिंदी ऐसी होनी चाहिए, जिसे अधिकारी और कर्मचारी बिना कठिनाई के अपने दैनिक कार्यों में प्रयोग कर सकें। उन्होंने कहा कि राजभाषा का प्रभावी कार्यान्वयन केवल राजभाषा अनुभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक विभाग और अधिकारी-कर्मचारी की सामूहिक सहभागिता से संभव है।read more:https://pahaltoday.com/demand-to-remove-government-country-liquor-shop-villagers-stage-protest-at-the-collectorate/#google_vignetteउन्होंने पत्राचार, टिप्पण, प्रारूपण, प्रशासनिक शब्दावली और हिंदी में प्रभावी अभिव्यक्ति से जुड़े विभिन्न विषयों पर उदाहरणों के माध्यम से मार्गदर्शन किया। मुख्य अतिथि प्रभाकर राव ने हिंदी पखवाड़े के आयोजन के लिए मानव संसाधन एवं राजभाषा अनुभाग की सराहना करते हुए कहा कि हिंदी का वास्तविक विकास तभी होगा, जब इसका प्रयोग दैनिक कार्यालयीन कार्यों में स्वाभाविक रूप से बढ़े। राजभाषा हिंदी का प्रयोग निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति तक सीमित न रहकर सहज कार्यसंस्कृति और प्रभावी संवाद का हिस्सा बनना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से पत्राचार, टिप्पणियों, प्रतिवेदनों, प्रस्तुतियों तथा डिजिटल माध्यमों में सरल और स्पष्ट हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तकनीक ने भारतीय भाषाओं में काम करने की संभावनाओं को व्यापक बनाया है, इसलिए डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर हिंदी में कार्यालयीन कार्य को और प्रभावी बनाया जाना चाहिए। कार्यशाला के प्रथम सत्र में राजभाषा नीति, कार्यालयीन हिंदी, पत्राचार, टिप्पण एवं प्रारूपण तथा दैनिक कार्यों में हिंदी के प्रयोग पर चर्चा हुई। दूसरे सत्र में डिजिटल परिवेश में हिंदी, तकनीकी माध्यमों में राजभाषा के प्रयोग और प्रभावी कार्यालयीन अभिव्यक्ति पर संवाद हुआ। प्रतिभागियों ने राजभाषा कार्यान्वयन से जुड़े प्रश्न रखे, जिनका डॉ. मिश्र ने उदाहरणों के माध्यम से समाधान किया। इस अवसर पर डॉ. राजेंद्र प्रसाद मिश्र को एनटीपीसी सिंगरौली की ओर से सम्मानित भी किया गया। कार्यशाला में महाप्रबंधकगण, विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। गौरतलब है कि हिंदी पखवाड़ा-2026 के तहत 14 से 28 सितंबर तक एनटीपीसी सिंगरौली में विभिन्न प्रतियोगिताओं, विचार गोष्ठियों और राजभाषा संवर्धन कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

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