नजीबाबाद मंडी पहुंचने पर खुशनुमा का जोरदार स्वागत

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नजीबाबाद। लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मंडी सचिव का नियुक्ति पत्र प्राप्त करने के बाद नजीबाबाद मंडी पहुंचीं कुमारी खुशनुमा का मंडी समिति के अधिकारियों-कर्मचारियों एवं व्यापारियों ने जोरदार स्वागत किया। इस दौरान उन्हें गुलदस्ता एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। मंडी कर्मचारियों ने केक काटकर अपनी खुशी का इजहार किया।
कुमारी खुशनुमा 29 अगस्त 2024 से कृषि उत्पादन मंडी समिति नजीबाबाद में मंडी निरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता का सिलसिला लगातार जारी रखते हुए समीक्षा अधिकारी, अधिशासी अधिकारी, लेखा परीक्षक समेत एक दर्जन से अधिक प्रतियोगी परीक्षाएं उत्तीर्ण की हैं। उनकी इस उपलब्धि को युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के सरकारी यूट्यूब चैनल पर भी उनकी तस्वीर प्रदर्शित की गई है।कार्यक्रम का संचालन व्यापारी हाशिम अहमद ने किया। मंडी सचिव सचिन शर्मा ने कहा कि मेहनत और लगन से किया गया प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता, सफलता अवश्य मिलती है। उन्होंने खुशनुमा को उनकी उपलब्धि पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।वहीं, कुमारी खुशनुमा ने मंडी सचिव सचिन शर्मा को अपना गुरु बताते हुए उन्हें शॉल ओढ़ाकर एवं गुलदस्ता भेंट कर आभार व्यक्त किया।read more:https://pahaltoday.com/ballia-police-receive-two-modern-interceptor-bikes-sp-omvir-singh-flags-them-off/ उन्होंने कहा कि नजीबाबाद मंडी में कार्य करते हुए उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों एवं सहकर्मियों से काफी कुछ सीखने का अवसर मिला।इस अवसर पर मंडी समिति की ओर से मंडी सचिव सचिन शर्मा, ममता सक्सेना, संगीता, हरेराम सिंह, नरेंद्र सिंह, जसवीर सिंह, विक्रम सिंह, पूर्व लिपिक सुनील कुमार तथा मंडी व्यापार कमेटी की ओर से हाशिम अहमद, डॉ. इदरीस अंसारी, आबिद हुसैन, शाहनवाज मौसमी वाला, मास्टर यूनुस, सईद जलालाबाद, नईम अंसारी, अयाज आलम, मोइनुद्दीन अंसारी, सरफराज अहमद, इफ्तखार पहलवान, शाहबाज एडवोकेट आदि मौजूद रहे।
 *पिता की यादों को लेकर भावुक दिखाई दीं खुशनुमा* 
कुमारी खुशनुमा ने भले ही एक के बाद एक प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की हो, लेकिन पिता की कमी का दर्द आज भी उनकी आंखों में साफ दिखाई देता है। करीब छह वर्ष पूर्व उनके पिता का निधन हो गया था, जिसके बाद परिवार की जिम्मेदारियों का बड़ा बोझ उनके कंधों पर आ गया। संघर्ष के दौर में उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और पढ़ाई को अपनी प्राथमिकता बनाए रखा।
नियुक्ति पत्र मिलने के बाद सफलता की खुशी के बीच जब पिता की याद आई तो खुशनुमा भावुक हो उठीं और उनकी आंखों में आंसू छलक आए। उन्होंने कहा कि आज यदि उनके पिता जीवित होते तो उनकी सफलता पर सबसे अधिक खुशी उन्हें ही होती। पिता की यादें उनकी इस उपलब्धि को खुशी के साथ-साथ भावुकता से भी जोड़ देती हैं।

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