पहले वोटर लिस्ट से बाहर हुए फिर कोर्ट से न्याय मिला और चुनाव जीत गए मोताब

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने एक ऐसी कहानी को जन्म दिया है, जो लोकतंत्र में अटूट विश्वास और संघर्ष की मिसाल है। 58 वर्षीय मोताब शेख, जिनकी एक महीने पहले तक सबसे बड़ी जद्दोजहद सिर्फ अपना नाम वोटर लिस्ट में वापस जुड़वाने की थी, आज पश्चिम बंगाल विधानसभा के उन दो कांग्रेस विधायकों में से एक हैं जिन्होंने तृणमूल और भाजपा की लहर के बीच जीत का परचम लहराया है।मुर्शिदाबाद जिले की फरक्का सीट से चुनाव जीतने वाले शेख ने न केवल अपनी नागरिकता और मतदान के अधिकार की लड़ाई जीती, बल्कि चुनावी मैदान में विरोधियों को पस्त कर एक नई इबारत लिख दी है। मोताब शेख का नाम एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान जांच-पड़ताल के बाद वोटर लिस्ट से हटा दिया गया था। इस अन्याय के खिलाफ उन्होंने हार नहीं मानी और निचली अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया। किस्मत का पलड़ा तब बदला जब 5 अप्रैल को, नामांकन की अंतिम तिथि से महज एक दिन पहले, देश की सर्वोच्च अदालत ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बाद 6 अप्रैल को उन्होंने अपना नामांकन दाखिल किया और महज 14 दिनों के संक्षिप्त प्रचार अभियान के बावजूद 8000 से अधिक मतों के अंतर से जीत दर्ज की। शेख को कुल 63,050 वोट मिले, जबकि सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस इस सीट पर तीसरे स्थान पर खिसक गई। अपनी इस ऐतिहासिक जीत पर भावुक होते हुए शेख ने कहा कि वे खुद को दुनिया के सबसे खुशकिस्मत लोगों में से एक मानते हैं। उन्होंने बताया कि जब वोटर लिस्ट से उनका नाम कटा था, तो उन्हें लगा था कि वे कभी वोट भी नहीं दे पाएंगे, लेकिन आज जनता ने उन्हें चुनकर विधानसभा भेज दिया है।read more:https://khabarentertainment.in/vitamin-d-and-future-brain-health-in-middle-age-a-study-based-analysis-dr-archita-mahajan/ कांग्रेस पार्टी ने भी उनकी जीत को मील का पत्थर बताते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि मोताब की जीत साबित करती है कि जनता का भरोसा अब भी कांग्रेस की विचारधारा पर अडिग है। पेशे से पूर्व ठेकेदार और लंबे समय से कांग्रेस के सिपाही रहे शेख के सामने अब कई चुनौतियां हैं। उनके क्षेत्र फरक्का में पीने के पानी की भारी किल्लत है और हजारों लोग अब भी त्रुटिपूर्ण वोटर लिस्ट की वजह से परेशान हैं। शेख का कहना है कि वे नई सरकार के साथ टकराव के बजाय सहयोग की नीति अपनाएंगे ताकि अपने क्षेत्र का विकास करा सकें। उनकी प्राथमिकता उन असली नागरिकों को फिर से वोटर लिस्ट में जगह दिलाना है, जिन्हें बेवजह इस प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है। वर्ष 2021 के शून्य के मुकाबले 2026 में कांग्रेस की यह वापसी मोताब शेख जैसे संघर्षशील चेहरों के दम पर ही संभव हो पाई है।

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