खुलासा: ट्रांसपोर्ट नगर में अवैध दुकानें, 10 हजार से 35 हजार तक किराया और बिजली चोरी का खेल

Share
सहारनपुर में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत विकसित ट्रांसपोर्ट नगर योजना अब बड़े विवादों में घिरती नजर आ रही है जहां ट्रांसपोर्ट गतिविधियों के लिए आवंटित भूखंडों का बड़े स्तर पर दुरुपयोग कर उन्हें व्यावसायिक दुकानों और गोदामों में बदलकर किराए पर दिए जाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं इस पूरे मामले में सहारनपुर विकास प्राधिकरण और विद्युत विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है ट्रांसपोर्ट नगर योजना का मूल उद्देश्य शहर के भीतर भारी वाहनों के दबाव को कम करना और ट्रांसपोर्ट व्यवसाय को व्यवस्थित रूप से एक स्थान पर स्थापित करना था लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति पूरी तरह अलग दिखाई दे रही है सूत्रों के अनुसार कई ट्रांसपोर्टरों ने बड़े भूखंड लेकर उन पर नियमों की अनदेखी करते हुए अवैध रूप से दुकानों और गोदामों का निर्माण कर लिया है और उन्हें किराए पर देकर मोटी कमाई का जरिया बना लिया है जानकारी के मुताबिक एक दुकान का मासिक किराया लगभग 10000 रुपये तक वसूला जा रहा है जबकि बड़े गोदामों का किराया 15000 से लेकर 20000 और कुछ मामलों में 30000 रुपये तक पहुंच रहा है
हाल ही में ट्रांसपोर्ट नगर में धागा कपड़ा और रुई के गोदाम में लगी भीषण आग ने भी इस पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है बताया जा रहा है कि यह गोदाम भी इसी तरह अवैध रूप से किराए पर दिया गया था जिससे सुरक्षा व्यवस्था और नियमों के पालन पर भी सवाल खड़े हो गए हैंread more:https://khabarentertainment.in/birth-anniversary-of-bharat-ratna-baba-saheb-dr-bhimrao-ambedkar-celebrated-with-great-pomp/ इस पूरे मामले में नियमों की खुलेआम अनदेखी देखने को मिल रही है जहां एक ही व्यक्ति के नाम आवंटित भूखंड पर 8 से 10 तक दुकानें बनाकर अलग अलग लोगों को किराए पर दे दिया गया है जबकि नियमों के अनुसार ऐसा करना पूरी तरह अवैध है इसके साथ ही बिजली व्यवस्था में भी बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं अधिकांश स्थानों पर एक ही बिजली कनेक्शन से कई दुकानों को सप्लाई दी जा रही है जिससे राजस्व का नुकसान तो हो ही रहा है साथ ही यह सीधे तौर पर बिजली चोरी का मामला भी बनता है स्थानीय लोगों का आरोप है कि दुकानदारों से प्रति यूनिट लगभग 10 रुपये तक बिजली शुल्क वसूला जा रहा है जो कि सरकारी दरों से अधिक है और इसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड भी नहीं रखा जाता यह स्थिति विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है कि आखिर इस प्रकार की अनियमितताएं लंबे समय से कैसे जारी हैं और संबंधित विभाग कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा वहीं सहारनपुर विकास प्राधिकरण की भूमिका भी संदेह के घेरे में है क्योंकि भूखंड आवंटन के समय उपयोग की स्पष्ट शर्तें तय की जाती हैं इसके बावजूद यदि उनका उल्लंघन हो रहा है तो निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी प्राधिकरण की ही बनती है स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम उठाए जाते तो यह स्थिति पैदा नहीं होती अवैध निर्माण पर कार्रवाई न होना प्रशासनिक ढिलाई या मिलीभगत की ओर इशारा करता है स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत सहारनपुर को आधुनिक और सुव्यवस्थित शहर बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं लेकिन इस तरह की अनियमितताओं के सामने आने से न केवल परियोजना की साख प्रभावित हो रही है बल्कि शहर की छवि पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है जहां एक ओर विकास के दावे किए जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इन दावों को कमजोर करती नजर आ रही हैread more:https://khabarentertainment.in/baba-saheb-dr-bhimrao-ambedkars-135th-birth-anniversary-celebrated-with-great-pomp/ स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है उनका कहना है कि ट्रांसपोर्ट नगर में अवैध निर्माण भूखंडों के दुरुपयोग और बिजली चोरी की गहन जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए साथ ही प्रत्येक दुकान और गोदाम के लिए अलग बिजली कनेक्शन सुनिश्चित किया जाए और अवैध वसूली पर तुरंत रोक लगाई जाए कुल मिलाकर ट्रांसपोर्ट नगर योजना में सामने आई ये अनियमितताएं प्रशासनिक व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करती हैं और यदि समय रहते इस पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या स्मार्ट सिटी के तहत पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो पाएगी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *