जमानियां (गाजीपुर)। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला योजना की जमीनी हकीकत रविवार को जमानियां नगर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पर देखने को मिली। सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक अस्पताल में अव्यवस्था का आलम रहा। प्रभारी चिकित्सक के कार्यालय पर ताला लटका मिला और अधिकांश चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मी अनुपस्थित रहे, जिससे इलाज कराने पहुंचे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।रविवार को आयोजित जन आरोग्य मेले में दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों और नगर कस्बे से बड़ी संख्या में मरीज इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे थे, लेकिन अस्पताल में चिकित्सकों और कर्मचारियों की अनुपस्थिति से उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। कई मरीजों ने घंटों इंतजार किया, लेकिन जब कोई व्यवस्था नहीं मिली तो वे मजबूर होकर निजी अस्पतालों में इलाज कराने चले गए।स्थानीय लोगों के अनुसार प्रभारी चिकित्सक डॉ. रुद्रकांत सिंह के अलावा तैनात चिकित्सक डॉ. जितेंद्र कुमार, डॉ. एलिना, डॉ. मनीषा सिंह सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मियों का भी पता नहीं चला। ओपीडी, फार्मासिस्ट और वार्ड बॉय की अनुपस्थिति के कारण स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह प्रभावित रहीं।raedmore:https://khabarentertainment.in/cunning-man-arrested-for-pressuring-woman-into-marriage-through-blackmail/
अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के तहसील अध्यक्ष मोहम्मद इजहार खान ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के नाम पर संचालित जन आरोग्य मेला चिकित्सकों की उदासीनता के कारण अपनी मूल भावना से भटक गया है। उन्होंने कहा कि मरीज इलाज और परामर्श के बिना लौटने को विवश हो रहे हैं, जबकि इस समय मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ा हुआ है और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे अधिक आवश्यकता है।मरीज वीरेंद्र कुमार, आलोक कुमार, सुभाष चौधरी, बबीता देवी, मंजू देवी, सुनैना देवी, राधिका देवी सहित अन्य लोगों ने बताया कि वे घंटों अस्पताल में बैठे रहे, लेकिन न तो डॉक्टर मिले और न ही कोई जिम्मेदार कर्मचारी। अंततः उन्हें निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ा।स्थानीय नागरिकों ने स्वास्थ्य विभाग से मामले की जांच कर लापरवाह चिकित्सकों और कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले में इसी प्रकार लापरवाही होती रही तो सरकार की जनकल्याणकारी योजना का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा और गरीब मरीजों का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से भरोसा उठ जाएगा।