विश्व मलेरिया दिवस पर जनपद में जागरूकता कार्यक्रम, सालभर चलेगा नियंत्रण अभियान

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गाजीपुर । जनपद में विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय सहित विभिन्न ब्लॉक स्तरीय स्वास्थ्य केंद्रों पर जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। सीएमओ कार्यालय सभागार में आयोजित गोष्ठी की अध्यक्षता एसीएमओ डॉ. सुनील पाण्डेय ने की।
गोष्ठी में बताया गया कि मलेरिया एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलने वाली गंभीर बीमारी है, जो प्रायः गंदे पानी के जमाव—जैसे अनुपयोगी कुएं, तालाब, सीमेंट टैंक, नाले और निचले इलाकों—में पनपता है। अधिकारियों ने ऐसे स्थलों की नियमित निगरानी और सफाई पर जोर दिया। सीएमओ ने कहा कि पहले मच्छरों का प्रकोप मुख्यतः बरसात और उसके बाद के समय में देखा जाता था, लेकिन अब लगभग पूरे वर्ष इसका खतरा बना रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए मलेरिया नियंत्रण अभियान को सालभर चलाने की रणनीति बनाई गई है। इस वर्ष की थीम “मलेरिया की समाप्ति का संकल्प—हम कर सकते हैं, हमें करना ही है” रखी गई है।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे एसीएमओ डॉ. जे.एन. सिंह ने बताया कि वर्तमान में संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान के तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मच्छरों के प्रजनन स्रोतों को नष्ट किया जा रहा है। एंटी-लार्वा छिड़काव और फॉगिंग की कार्रवाई भी नियमित रूप से कराई जा रही है, जिसमें नगर विकास और पंचायती राज विभाग का सहयोग मिल रहा है।read more:https://pahaltoday.com/bjp-government-is-being-formed-in-bengal-will-win-110-seats-in-the-first-phase-shah/उन्होंने बताया कि मलेरिया की जांच और उपचार की सुविधा जिला अस्पताल के साथ-साथ सभी सीएचसी और पीएचसी केंद्रों पर उपलब्ध है। आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित कर ग्रामीण क्षेत्रों में रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (आरडीटी) किट के माध्यम से त्वरित जांच कराई जा रही है। संक्रमित पाए जाने पर मरीज का तत्काल उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है। सहायक मलेरिया अधिकारी राम सिंह ने बताया कि मादा एनोफिलीज मच्छर के अंडे से वयस्क बनने में लगभग एक सप्ताह का समय लगता है, इसलिए सप्ताह में एक बार एंटी-लार्वा छिड़काव जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि कूलर, गमले, टीन के डिब्बे, नारियल के खोल और फ्रिज की डीफ्रॉस्ट ट्रे में जमा पानी को सप्ताह में कम से कम एक बार अवश्य खाली करें। लक्षण व बचाव: मलेरिया के प्रमुख लक्षणों में बुखार, कंपकंपी, ठंड लगना, सिरदर्द, बदन दर्द, मिचली और उल्टी शामिल हैं। बचाव के लिए मच्छरदानी का उपयोग, आसपास पानी जमा न होने देना और साफ-सफाई बनाए रखना जरूरी है। बुखार आने पर तुरंत आशा कार्यकर्ता या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने की सलाह दी गई है। समय पर जांच और उपचार से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है।

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