माँ का आशीर्वाद, प्रकृति का श्रृंगार: DM की पूज्यनीय माता जी ने कदम व धर्मपत्नी ने लगाया पीपल

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कानपुर देहात “माँ से बड़ा कोई नाम नहीं, पेड़ से बड़ा कोई दान नहीं।”_ इस भाव को जीवंत किया जिलाधिकारी श्री कपिल कुमार सिंह के परिवार ने। _वृक्षारोपण महाअभियान-2026_ के अंतर्गत डीएम की पूजनीया माताजी श्रीमती सरला सिंह कदम तथा धर्मपत्नी श्रीमती चारू सिंह ने रविवार को पीपल का पौधा रोपित कर जनपद को पर्यावरण संरक्षण का मार्मिक संदेश दिया।*संस्कार का पौधा, संकल्प की छाँव
पीपल को भारतीय संस्कृति में ‘देव-वृक्ष’ कहा जाता है — 24 घंटे ऑक्सीजन देने वाला, सैकड़ों साल आयु वाला, जैव-विविधता का घर। जब जिलाधिकारी की माता जी ने अपने हाथों से पीपल लगाया, तो वह केवल पौधा नहीं, _एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को दिया गया संस्कार_ था।  read more:https://khabarentertainment.in/509-vidyut-sakhis-in-bijnor-receive-thermal-printers-instant-electricity-bill-receipts-will-now-be-available-at-doorsteps/
वहीं श्रीमती चारू सिंह ने कहा — _“पीपल की तरह हमारी सोच भी बड़ी होनी चाहिए। यह पेड़ जितना बढ़ेगा, उतनी ही ठंडी छाँव आने वाली पीढ़ी को देगा। ‘एक पेड़ माँ के नाम’ का असली मतलब यही है — माँ की ममता की तरह निःस्वार्थ सेवा।”_
अधिकारी नहीं, अभिभावक की भूमिका
आमतौर पर वृक्षारोपण की खबरें अधिकारियों की फोटो तक सीमित रह जाती हैं। पर जब डीएम का परिवार खुद फावड़ा उठाए, पानी दे और पौधे को ‘परिवार का सदस्य’ बनाए, तो आम आदमी के लिए वह सबसे बड़ा प्रेरक क्षण बन जाता है।
जनपदवासियों ने कहा — _“साहब की माँ जब पेड़ लगा रही हैं, तो हमें भी अपनी माँ के नाम एक पेड़ जरूर लगाना चाहिए।”_
एक पेड़ माँ के नाम’ से ‘हर घर हरियाली’ तक
जिला प्रशासन ने इस वर्ष 35 करोड़ के राज्य-लक्ष्य में कानपुर देहात की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए हर विभाग, स्कूल, पंचायत को जोड़ा है। डीएम परिवार की यह पहल _‘जन-अभियान’_ को _‘परिवार-अभियान’_ बना रही है।
पीपल का पौधा दीर्घायु का प्रतीक है। संदेश साफ है — _“पेड़ लगाना एक दिन का काम नहीं, पूरी जिंदगी की जिम्मेदारी है। जैसे माँ हमें पालती है, वैसे ही हमें पेड़ पालना है।”_
अपील: नाम माँ का, काम हमारा
जिलाधिकारी श्री कपिल कुमार सिंह ने जनपदवासियों से अपील की कि हर परिवार अपनी माँ, दादी, नानी के नाम पर कम से कम एक देशी पौधा — नीम, पीपल, बरगद, जामुन, आम — जरूर लगाए और उसकी 3 साल तक देखभाल का संकल्प ले।
क्योंकि _माँ का कर्ज हम चुका नहीं सकते, पर उसके नाम का एक पेड़ लगाकर धरती का कर्ज जरूर उतार सकते हैं।_
हरियाली का रिश्ता, पीढ़ियों तक चलेगा
आज लगाया गया पीपल जब 50 साल बाद घना होगा, तब न DM होंगे, न हम-आप। पर उस दिन कोई राहगीर इसकी छाँव में बैठकर कहेगा — _“किसी माँ ने इसे लगाया था।”_

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