बहराइच (पयागपुर तहसील )। आजादी की लड़ाई का इतिहास केवल बड़े शहरों और चर्चित आंदोलनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गांव-कस्बों की धरती ने भी अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बहराइच का पयागपुर क्षेत्र भी उन गौरवशाली स्थानों में शामिल है, जहां स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ आवाज बुलंद कर देश की आजादी के आंदोलन को मजबूती दी थी। पयागपुर की मिट्टी आज भी उन क्रांतिकारियों के साहस और बलिदान की गवाही देती है।वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब महात्मा गांधी ने अंग्रेजों के खिलाफ ‘करो या मरो’ का आह्वान किया, तब इसकी गूंज पयागपुर क्षेत्र में भी सुनाई दी। बताया जाता है कि 20 अगस्त 1942 को पयागपुर क्षेत्र में क्रांतिकारियों की एक गुप्त बैठक हुई थी। बैठक में अंग्रेजी शासन की दमनकारी नीतियों के खिलाफ निर्णायक संघर्ष की रणनीति तैयार की गई। आजादी की लड़ाई के दौरान जब महात्मा गांधी पयागपुर पहुंचे तो उन्होंने बहराइच गोंडा मार्ग पर ग्राम रुकनापुर महरौली के पास एक बैग में प्रवास किया था जहां पर भूपगंज बाजार के तत्कालीन भामाशाह सेठ सूरजमल केडिया ने गांधी जी को आजादी की लड़ाई में योगदान के लिए चांदी के सिक्कों से भरी थैली सौंपी थी।आंदोलन की कमान पंडित स्वामी दयाल त्रिपाठी, विजय भारती, कांशीराम सैनी और मुट्ठू जैसे साहसी सेनानियों ने संभाली।
क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ खुलकर विरोध किया।read more:https://pahaltoday.com/villagers-upset-over-garbage-dumping-staged-a-protest-at-the-district-collectorate/विशेषवरगंज रेलवे स्टेशन पर अंग्रेजी शासन के प्रतीक यूनियन जैक को उतारकर उसकी जगह तिरंगा फहराया गया। इस घटना से क्षेत्र में स्वतंत्रता आंदोलन की लहर और तेज हो गई। क्रांतिकारियों ने रेलवे पटरियां उखाड़कर अंग्रेजी शासन की आवाजाही बाधित करने तथा सरकारी डाक व्यवस्था को प्रभावित करने का भी प्रयास किया।अंग्रेजी प्रशासन ने आंदोलन को दबाने के लिए दमनचक्र चलाया। कई स्वतंत्रता सेनानियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ मुकदमे चलाए गए। अनेक सेनानियों को जेल में यातनाएं सहनी पड़ीं और कठोर सजाएं भी भुगतनी पड़ीं। इसके बावजूद उनके हौसले नहीं टूटे।आज स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पयागपुर की धरती उन वीर स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष को याद कर रही है। जिन वीरों ने परिवार, सुख-सुविधा और जीवन की परवाह किए बिना देश की आजादी के लिए संघर्ष किया, उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रप्रेम, साहस और त्याग की प्रेरणा देता रहेगा। जिस धरती पर कभी अंग्रेजी हुकूमत के झंडे को उतारकर तिरंगा फहराया गया था, आज उसी धरती पर तिरंगा पूरे गौरव के साथ लहरा रहा है।