सहारनपुर। गंगोह क्षेत्र के कुंडाबसी गांव स्थित राणा फायर वर्क्स पटाखा फैक्टरी में हुए भीषण विस्फोट की जांच में नए तथ्य सामने आए हैं। शनिवार को मृत ठेकेदारों के पोस्टमार्टम के बाद चिकित्सकों ने पुष्टि की कि उनकी मौत आग से बुरी तरह झुलसने और शरीर पर आई गंभीर चोटों के कारण हुई। वहीं पुलिस ने फैक्टरी मालिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसकी तलाश तेज कर दी है। घटनास्थल से मिले मानव अवशेषों की डीएनए जांच भी कराई जाएगी, जिससे लापता मजदूरों के बारे में स्थिति स्पष्ट हो सके। शुक्रवार शाम बारूद का मिश्रण तैयार करते समय हुए धमाके में मध्य प्रदेश के खरगोन निवासी ठेकेदार दीपराज देवड़े (23) और संदीप (25) की मौके पर ही मौत हो गई थी। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि फैक्टरी के कमरे और टिनशेड पूरी तरह उड़ गए तथा शवों के अवशेष करीब 600 मीटर तक बिखर गए। पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकों के अनुसार विस्फोट के बाद उठी तेज चिंगारियों और आग की लपटों से दोनों ठेकेदार गंभीर रूप से झुलस गए थे। इसके अलावा शरीर के विभिन्न हिस्सों पर गहरी चोटें भी मिलीं। शवों की स्थिति अत्यंत क्षतिग्रस्त होने के कारण डॉक्टरों को अलग-अलग अंगों की जांच कर पोस्टमार्टम पूरा करना पड़ा। घटना के बाद पुलिस ने फैक्टरी मालिक हसन, निवासी असालतपुर फर्रुखनगर (गाजियाबाद) के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 105, 288 तथा विस्फोटक अधिनियम की धारा 5ध्9-बी के तहत मुकदमा दर्ज किया है। प्रारंभिक जांच में लाइसेंस की शर्तों और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की बात सामने आई है। हादसे के बाद से फैक्टरी मालिक फरार है और पुलिस उसकी गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है।read more:https://khabarentertainment.in/509-vidyut-sakhis-in-bijnor-receive-thermal-printers-instant-electricity-bill-receipts-will-now-be-available-at-doorsteps/ विस्फोट के बाद से लापता मजदूर आकाश रावत और राहुल उर्फ लालू का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। पुलिस ने घटनास्थल और आसपास से मिले मानव अवशेषों को सुरक्षित कर लिया है। इनकी डीएनए जांच कराई जाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ये अवशेष मृत ठेकेदारों के हैं या लापता मजदूरों के। सुरक्षा के मद्देनजर फैक्टरी परिसर को सील कर दिया गया है। फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीम परिसर में मौजूद बारूद और तैयार पटाखों पर लगातार पानी डालकर उन्हें निष्क्रिय कर रही है, ताकि दोबारा विस्फोट की आशंका न रहे। दूसरी ओर श्रम विभाग ने भी जांच शुरू कर मजदूरों के बयान दर्ज किए हैं और यह पता लगाया जा रहा है कि फैक्टरी में सुरक्षा मानकों एवं श्रम कानूनों का पालन किया जा रहा था या नहीं। सीओ शशिप्रकाश शर्मा ने बताया कि लापता मजदूरों की तलाश जारी है। डीएनए जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद हादसे के वास्तविक कारणों का खुलासा किया जाएगा तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।