कीचड़ और राजनीति की भेंट चढ़ी खसहा मोहम्मद पुर कुट्टी -मंसूपुरवा की मुख्य सड़क

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बहराइच महसी )l एक तरफ सरकार ग्रामीण इलाकों को मुख्य मार्गों से जोड़कर ‘सुलभ आवागमन’ के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है, वहीं दूसरी तरफ विकास खंड तजवापुर की ग्राम पंचायत खसहा मोहम्मद पुर कुट्टी में विकास योजनाएं धरातल पर दम तोड़ चुकी हैं। यहाँ का जनोपयोगी मुख्य मार्ग विगत कई वर्षों से अपने जीर्णोद्धार की आस ताक रहा है, लेकिन ग्राम्य विकास के जिम्मेदारों की घोर लापरवाही के कारण यह आज बदहाली के आंसू बहा रहा है।read more:https://khabarentertainment.in/prof-dr-rajendra-rajput-receives-guru-shree-2026-award-at-national-level-brings-honour-to-ghazipur/हजारों की आबादी घुटने भर कीचड़ में चलने को मजबूर-कुट्टी, मंसूपुरवा, ऊचेंपुरवा, खालेपुरवा, चाइनपुरवा, शुकलनपुरवा और गहिरवा जैसे कई गांवों को मुख्य पक्के मार्ग से जोड़ने वाला यह इकलौता रास्ता है। वर्तमान में यह मार्ग पूरी तरह से बजबजाते गंदे पानी और घुटने तक कीचड़ से पट चुका है। स्कूल जाने वाले नौनिहाल हों, बुजुर्ग हों या कोई बीमार, हर कोई इस नारकीय रास्ते से होकर गुजरने को मजबूर है। चुनाव आते हैं, योजनाएं बनती हैं, लेकिन इस मार्ग के दिन नहीं बहुरे। शासन-प्रशासन के ‘गड्ढामुक्त’ और ‘चमकदार’ सड़कों के दावे यहाँ आकर पूरी तरह हवा-हवाई साबित हो जाते हैं।-ग्राम प्रधान सहित सचिव की घोर लापरवाही-इस मार्ग की दुर्दशा के लिए सीधे तौर पर स्थानीय ग्राम प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी (सचिव) दोषी हैं। नियमों के मुताबिक ग्राम पंचायत की नियमित बैठकों में क्षेत्र की जनसमस्याओं और सड़कों के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव लाना अनिवार्य होता है। हैरान करने वाली बात यह है कि ग्राम पंचायत के पूरे कार्यकाल में आज तक एक बार भी इस मुख्य मार्ग के निर्माण या मरम्मत का प्रस्ताव बैठक में नहीं रखा गया।ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम प्रधान की जुगलबंदी ने जनता की इस गंभीर समस्या को पूरी तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया। न तो ग्राम प्रधान ने इसके लिए कोई इच्छाशक्ति दिखाई और न ही ग्राम विकास अधिकारी ने इसके निर्माण के लिए कोई सरकारी प्रस्ताव (एस्टीमेट) तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेजा। सरकारी बजट का बंदरबांट और कागजी विकास की आड़ में इन दोनों जिम्मेदारों ने हजारों की आबादी को कीचड़ में सड़ने के लिए बेसहारा छोड़ दिया है।-सत्ता के वफादार मतदाताओं को मिला ‘दुर्भाग्य का तोहफा’-इस मार्ग के न बनने के पीछे स्थानीय स्तर की गंदी राजनीति भी साफ नजर आती है। क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग का उपयोग करने वाले अधिकांश लोग सत्ताधारी दल के समर्पित मतदाता हैं। विडंबना देखिए कि केंद्र, प्रदेश और स्थानीय विकास खंड तीनों स्तरों पर उसी दल की सरकार है, जिसे इन ग्रामीणों ने आंख मूंदकर चुना था। लेकिन विकास के नाम पर उन्हें मिला तो सिर्फ घुटने तक बजबजाता गंदा पानी। स्थानीय जनप्रतिनिधि, क्षेत्र पंचायत सदस्य और ग्राम प्रधान, चुनाव जीतने के बाद जनता की सुध लेना भूल गए हैं।-कब जागेगा सोया हुआ प्रशासन?-कुट्टी -मंसूपुरवा का यह बदहाल मुख्य मार्ग चीख-चीखकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ब्लॉक प्रशासन की निकम्मेपन की गवाही दे रहा है। ग्रामीणों में अब ग्राम प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी के खिलाफ भारी आक्रोश है। यदि जल्द ही इस मार्ग का जीर्णोद्धार नहीं कराया गया, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। देखना यह है कि जिला प्रशासन के आला अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर दोषियों पर क्या कार्रवाई करते हैं और इस त्रस्त जनता को कीचड़ से कब मुक्ति मिलती है।

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