खसरा कांड की फाइल आठ साल से फांक रही धूल, नहीं हुआ खुलासा

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सोनभद्र। नगर पालिका से वर्ष 2018 में खसरा अभिलेख गायब होने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। अज्ञात लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज होने के बावजूद लगभग आठ वर्ष बीत जाने पर भी न तो जांच की अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक हुई और न ही किसी जिम्मेदार व्यक्ति पर कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने आई। इससे पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।read more:https://pahaltoday.com/star-hospital-is-proving-to-be-a-boon-for-poor-and-helpless-patients/सपा के पूर्व विधायक अविनाश कुशवाहा ने तीखा हमला करते हुए कहा कि खसरा केवल एक कागज नहीं, बल्कि भूमि स्वामित्व और राजस्व रिकॉर्ड का आधार माना जाता है। ऐसे महत्वपूर्ण सरकारी अभिलेख का गायब होना सामान्य घटना नहीं मानी जा सकती। सवाल यह है कि यदि सरकारी रिकॉर्ड सुरक्षित नहीं हैं तो आम नागरिक अपनी जमीन के अधिकारों को लेकर कैसे निश्चिंत रहेगा। सोनभद्र पहले से ही भूमि विवादों के कारण संवेदनशील जिला रहा है। उम्भा कांड जैसे दर्दनाक घटनाक्रम ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। इसके बावजूद यदि राजस्व अभिलेखों की सुरक्षा और उनसे जुड़े मामलों की जांच वर्षों तक अधर में लटकी रहे, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। तहसील दिवसों में आज भी सबसे अधिक शिकायतें जमीन और राजस्व अभिलेखों से जुड़ी आती हैं। उन्होंने मांग की कि यदि जांच पूरी हो चुकी है तो क्लोजर रिपोर्ट सार्वजनिक किया जाए, और यदि जांच अभी भी जारी है, तो आखिर आठ वर्षों में जांच किस मोड़ पर है, क्या जांच में अब तक कोई ठोस सुराग मिला है या नहीं, इसकी जानकारी सार्वजनिक किया जाए। उहोंने कहा कि जनता यह जानना चाहती है कि इस मामले की विवेचना किस अधिकारी के पास रही, और अब तक जांच में कितनी प्रगति हुई। किन-किन लोगों से पूछताछ की गई। यदि दोषी सामने आ चुके हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने शासन-प्रशासन से इस पर हस्तक्षेप की मांग किया है। नपा कार्यालय में वर्षों से जमे कर्मियों पर भ्रष्टाचार बढ़ाने का आरोप सोनभद्र। नगर पालिका कार्यालय में वर्षों से एक ही शाखा में जमे कुछ कर्मचारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनाती के चलते कार्यालय में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से जमे कर्मचारियों के कारण पारदर्शिता प्रभावित हुई है। लोगों ने ऐसे कर्मियों का तत्काल स्थानांतरण कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, ताकि नगर पालिका की कार्यप्रणाली में सुधार हो सके।

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