पेट्रोल-डीजल की जगह अब एथेनॉल: आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम

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अनिकेत सिंह 
खाड़ी युद्ध के कारण भारत में तेल की सप्लाई पर गंभीर असर पड़ा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य से भारत का एक भी टैंकर बाहर निकल जाए तो सरकार राहत महसूस करती है। सरकार को चिंता इस बात की थी कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनावों के दौरान यदि तेल के दाम बढ़ते, तो पेट्रोल-डीजल महंगे हो जाते। हालांकि फिलहाल खाड़ी युद्ध के समाधान के कोई संकेत नजर नहीं आ रहे हैं।read more:https://pahaltoday.com/global-brokerage-firm-bernstein-wrote-a-letter-to-pm-modi-saying-economic-challenges-should-be-resolvedइसी वजह से दुनिया के कई देशों में पेट्रोल, डीजल और गैस की कमी शुरू हो गई है। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। भारत पेट्रोल-डीजल की कमी से निकलने का विकल्प खोज रहा था और अब उसने नया रास्ता ढूंढ लिया है। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि भारत को 100 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेंडिंग की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। इससे बजट नियंत्रित होगा और देश के ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी। वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का लगभग 87 प्रतिशत तेल विदेशों से आयात करता है। इसके कारण देश पर आर्थिक बोझ बढ़ता है। हर साल लगभग 22 लाख करोड़ रुपए पेट्रोल और डीजल के आयात पर खर्च होते हैं। यदि एथेनॉल जैसे ईंधन का उपयोग बढ़ेगा तो यह खर्च कम हो सकता है और प्रदूषण भी घटेगा। पेट्रोल या डीजल जैसे पारंपरिक ईंधनों में एथेनॉल को एक निश्चित मात्रा में मिलाने की प्रक्रिया को एथेनॉल ब्लेंडिंग कहा जाता है। एथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है। यह मुख्य रूप से गन्ने का रस, शीरा (मोलासिस), मक्का, सड़े हुए आलू और खराब हो चुके चावल या गेहूं से बनाया जाता है। खास बात यह है कि यह एक नवीकरणीय (Renewable) ईंधन है। सरकार पहले ही E20 पेट्रोल यानी 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित ईंधन शुरू कर चुकी है। इसकी शुरुआत 2023 से हुई थी। अब कई गाड़ियों में छोटे बदलावों के साथ इसका उपयोग शुरू हो चुका है। इससे इंजन की उम्र भी बढ़ती है। नितिन गडकरी ने उदाहरण देते हुए कहा कि ब्राजील जैसे देश 100 प्रतिशत एथेनॉल का उपयोग कर रहे हैं। भारत भी उस दिशा में आगे बढ़ सकता है। इसके लिए फ्लेक्स-फ्यूल इंजन वाले वाहनों को बढ़ावा देना जरूरी है। 100 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेंडिंग यानी 100 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E100) लगभग शुद्ध हाइड्रस एथेनॉल से बना ईंधन है। इसका उपयोग सामान्य पेट्रोल इंजन के बजाय विशेष फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल (FFV) में किया जाता है। यह टिकाऊ ईंधन पेट्रोल का स्वच्छ और हाई-ऑक्टेन विकल्प है। इसका उद्देश्य उत्सर्जन घटाना और ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाना है। यदि 100 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेंडिंग लागू होती है तो वाहन चलाने के लिए पेट्रोल पर निर्भरता खत्म हो जाएगी। इससे भारत के कच्चे तेल के आयात में कमी आएगी। शुद्ध एथेनॉल जलने पर कार्बन और जहरीली गैसों का उत्सर्जन बहुत कम होता है। इसलिए प्रदूषण कम करने में भी यह बड़ी भूमिका निभा सकता है। एथेनॉल कृषि उत्पादों से बनाया जाता है, इसलिए इसका उपयोग बढ़ने से किसानों (गन्ना, मक्का, चावल उगाने वाले) और उत्पादन करने वाली फैक्ट्रियों को भी लाभ होगा। शुद्ध पेट्रोल की तुलना में एथेनॉल का उत्पादन खर्च सामान्यतः कम होता है। 100 प्रतिशत एथेनॉल ईंधन पेट्रोल की तुलना में काफी सस्ता हो सकता है। भारत में इसकी कीमत 60 से 70 रुपए प्रति लीटर के आसपास रहने का अनुमान है। फिलहाल भारत में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जा रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इससे भारत के आयात बिल में भारी कमी आएगी और तेल के मामले में देश आत्मनिर्भर बन सकेगा।तेल सप्लाई पूरी तरह बंद होने के बजाय जारी रही, इसलिए सरकार ने पेट्रोल-डीजल के दामों में बहुत बड़ा इजाफा नहीं किया। वरना कीमतें बढ़ने से भाजपा विरोधी मतदान को बढ़ावा मिल सकता था।

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