अशोक भाटिया,
गिरगिट भी शरमा जाए जिस रफ्तार से केजरीवाल ने अपने आदर्श बदले हैं। कल तक जो नेता इनके दांये बांये खड़े होकर कसीदे पढ़ते थे आज वही इन्हें बीच मझधार में छोड़कर भाग रहे हैं। सत्ता के लालच में बना यह कुनबा अब पूरी तरह बिखर चुका है और केजरीवाल की हैसियत अब उस सेनापति जैसी हो गई है जिसकी सेना ही उसे गद्दार मानकर मैदान छोड़ चुकी है। बहरहाल आम आदमी पार्टी को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। राज्यसभा में आप के 10 सांसदों में से राघव चड्ढा समेत सात सांसदों ने बीजेपी में विलय कर लिया है। इस कदम के बाद राज्यसभा में अब आप के केवल तीन सदस्य बचे हैं। इसके अलावा पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले आप में इतनी बड़ी टूट आम आदमी पार्टी के लिए बड़ी परेशानी साबित हो सकती है। हालांकि माना जा रहा है कि अरविंद केजरीवाल को पहले ही अंदेशा था पार्टी के भीतर कुछ लोग खुश नहीं है। यही वजह है कि उन्होंने इन लोगों को अपने घर मिलने के लिए बुलाया था। मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया है कि केजरीवाल ने सांसदों से कहा था कि अगर उन्हें किसी भी बात की आशंका है तो आप अपने पदों से इस्तीफा दे दें और आपको अगले कार्यकाल तक फिर टिकट दिया जाएगा। जानकारी के मुताबिक केजरीवाल ने इसी सिलसिले में बात करने के लिए इन सांसदों को अपने घर मीटिंग के लिए बुलाया था लेकिन सांंसदों ने पहले ही बीजेपी में विलय का ऐलान कर दिया और ये मीटिंग कभी हो ही नहीं सकी। केजरीवाल को इस बात की भनक नहीं थी कि ये सांसद पहले ही बीजेपी में जाने का मन बना चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन सांसदों ने मिलकर पार्टी छोड़ने की कोई योजना नहीं बनाई थी बल्कि सभी ने व्यक्तिगत रूप से फैसला लिया था। जब आप ने राघव चड्ढा की जगह अशोक मित्तल को डिप्टी लीडर पद के लिए चुना तभी राघव चड्ढा ने सांसदों से संपर्क किया और उनसे बातचीत की। इसी दौरान अशोक मित्तल ने भी आम आदमी पार्टी छोड़ने का मन बना लिया। इन सांसदों के इस्तीफे की जानकारी मध्य दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में जल्दबाजी में बुलाई गई प्रेसवार्ता में दी गई, जिसके कारण कई लोग हैरान रह गए। इसके बाद ‘आप’ के प्रमुख केजरीवाल ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने पंजाब की जनता के साथ विश्वासघात किया है, जबकि राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पार्टी छोड़ने वाले सातों सांसदों को गद्दार करार दिया। वहीं भाजपा ने सांसदों का गर्मजोशी से स्वागत किया और पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने उन्हें मिठाई खिलाई।read more;https://pahaltoday.com/pawan-khera-gets-a-setback-from-the-high-court-anticipatory-bail-plea-rejected/नवीन ने इसके तुरंत बाद ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, आज पार्टी मुख्यालय में राघव चड्ढा जी, संदीप पाठक जी और अशोक मित्तल जी का भाजपा परिवार में स्वागत किया। साथ ही, हरभजन सिंह जी, स्वाति मालीवाल जी, विक्रम साहनी जी और राजेंद्र गुप्ता जी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गतिशील नेतृत्व में 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर काम करने के लिए शुभकामनाएं। इससे पहले राघव चड्ढा ने कहा, जिस आम आदमी पार्टी को मैंने अपने खून-पसीने से सींचा, अपनी जवानी के 15 साल दिए, वह अपने सिद्धांतों, मूल्यों और नैतिकता से पूरी तरह भटक गई है। हाल ही में चड्ढा को राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया गया और उनकी जगह मित्तल को नियुक्त किया गया था। उन्होंने पार्टी के 10 सांसदों को लेकर कहा, संविधान के अनुसार, किसी पार्टी के कुल सांसदों में से दो-तिहाई सांसद दूसरी पार्टी में शामिल हो सकते हैं। चड्ढा ने कहा, उन्होंने (सांसदों) पहले ही हस्ताक्षर कर दिए थे, और आज सुबह हमने राज्यसभा के सभापति को हस्ताक्षरित पत्रों और अन्य औपचारिक दस्तावेजों समेत सभी आवश्यक दस्तावेज सौंप दिए। आप के राष्ट्रीय महासचिव रहे पाठक ने भी कहा कि पार्टी उन सिद्धांतों से भटक गई है जिनपर इसकी स्थापना हुई थी। सात सांसदों में से चड्ढा, पाठक, मित्तल, राजेंद्र गुप्ता, विक्रम साहनी और हरभजन सिंह समेत छह सांसद पंजाब जबकि स्वाति मालीवाल दिल्ली से हैं। आप के जिन तीन राज्यसभा सदस्यों ने अब भी पार्टी से अपना संबंध बनाए रखा है, उनमें संजय सिंह, एनडी गुप्ता और बलबीर सिंह सीचेवाल शामिल हैं। संजय सिंह ने आरोप लगाया है कि बीजेपी ‘ऑपरेशन लोटस’ के जरिए भगवंत मान सरकार को गिराना चाहती है। राज्यसभा के सात सांसदों का जाना इस बात का संकेत है कि पंजाब में भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।ये सातों सांसद पंजाब को रिप्रेजेंट करते हैं। राघव चड्ढा का बीजेपी में जाना पंजाब के कैडरों में बड़ी सेंधमारी कर सकता है। राघव चड्ढा ने बीजेपी में शामिल होते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 सालों में केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक फैसले लिए हैं।यही राघव चड्ढा कुछ समय पहले तक केंद्र सरकार की नीतियों के सबसे मुखर आलोचक थे। उनका यह यू-टर्न दिखाता है कि विपक्षी एकता के दावों में कितनी खोखलापन है। केजरीवाल जो खुद को मोदी के विकल्प के रूप में पेश कर रहे थे, उनके अपने सबसे खास सिपहसालार ही अब मोदी के नेतृत्व में देश सेवा की बात कर रहे हैं। यह केजरीवाल के नेशनल एम्बिशन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। हालांकि, राजनीति में केवल भावनाओं से काम नहीं चलता। जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि आखिर एक साथ इतने सारे वरिष्ठ नेता पार्टी क्यों छोड़ रहे हैं?अगर केजरीवाल अपने सबसे भरोसेमंद साथियों को साथ नहीं रख पा रहे, तो वह देश कैसे चलाएंगे? यह सवाल अब सोशल मीडिया से लेकर गलियों तक गूंजने लगा है। यह कहना गलत नहीं होगा कि आम आदमी पार्टी अपनी स्थापना के बाद के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे नेता और अब सांसदों की सामूहिक बगावत ने पार्टी की साख को मिट्टी में मिला दिया है।केजरीवाल के लिए यह सिर्फ एक राजनीतिक हार नहीं, बल्कि एक व्यक्तिगत हार भी है। राघव चड्ढा और संदीप पाठक जैसे लोग उनके घर के सदस्यों की तरह थे। अब जब घर के लोग ही साथ छोड़ गए हैं, तो बाहर की लड़ाई और भी कठिन हो गई है।क्या केजरीवाल इस मलबे से अपनी पार्टी को दोबारा खड़ा कर पाएंगे या यह AAP के पतन की शुरुआत है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।