लखनऊ: आज हमारे सामने खड़ा संकट केवल ‘कॉर्पोरेट’ क्षेत्र तक सीमित नहीं है। जहाँ भी अवसर मिल रहा है, वहाँ भारत के अस्तित्व को खोखला करने और देश के लचके तोड़ने का सुनियोजित षड्यंत्र चल रहा है। कॉर्पोरेट जिहाद के माध्यम से हमारी युवा पीढ़ी की विचारधारा और धर्म पर जो व्यवस्थित आक्रमण हो रहा है, वह अत्यंत चिंताजनक है। इसमें केवल प्रत्यक्ष अपराधियों को ही नहीं, बल्कि उन्हें गुप्त रूप से सहायता पहुँचाने वाली पूरी व्यवस्था को कानून के दायरे में लाकर कठोर दंड देना आवश्यक है। इसके लिए मैं आगामी सत्र में संसद में ‘कॉर्पोरेट जिहाद’’ का मुद्दा उठाऊँगी। कॉर्पोरेट संस्थानों में बढ़ते जिहाद को रोकने के लिए, ये कंपनियाँ भारत में आने से पहले ही उन पर कुछ कड़े नियम और शर्तें लागू की जा सकती हैं क्या, इस पर भी विचार चल रहा है,’’ यह प्रखर प्रतिपादन भाजपा की राज्यसभा सांसद प्रा. डॉ. मेधा कुलकर्णी ने किया।read more:https://pahaltoday.com/big-decision-in-bengal-elections-entire-voting-in-falta-seat-cancelled-re-polling-to-be-held-on-may-21/हिंदू जनजागृति समिति द्वारा ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ और ‘लव जिहाद’ के विरुद्ध ‘बेटी सुरक्षित, राष्ट्र सुरक्षित’ राष्ट्रव्यापी अभियान का शुभारंभ पुणे में किया गया। शिवाजीनगर स्थित मॉडर्न कॉलेज ऑडिटोरियम में आयोजित ‘कॉर्पोरेट जिहाद: वास्तविक सत्य क्या है?’ विषय पर विशेष संवाद में वे बोल रही थीं। इस अवसर पर हिंदू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे और प्रसिद्ध लेखिका श्रीमती शेफाली वैद्य ने भी उपस्थित जनसमूह का मार्गदर्शन किया।
इस अवसर पर बोलते हुए प्रसिद्ध लेखिका श्रीमती शेफाली वैद्य ने कहा कि, ‘‘न केवल नासिक की टीसीएस जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनी, बल्कि ‘लेंसकार्ट’ जैसी पब्लिक लिमिटेड कंपनी में भी ‘हिजाब और पगड़ी मान्य है; लेकिन कुंकुम, तिलक और कलावा नहीं चलेगा’, जैसे हिंदू-विरोधी और असंवैधानिक नियम बनाए गए थे। भारी विरोध के बाद इन नियमों को केवल आठ दिनों के लिए शिथिल किया गया; यह भी कॉर्पोरेट जिहाद ही है। मुसलमान या अन्य धर्मों की परंपराएं स्वीकार्य हैं, लेकिन हिंदू धर्म की परंपराएं नहीं चलेंगी, यही मानसिकता बचपन से हिंदुओं पर थोपी जाती है। परिणामतः, कॉर्पोरेट संस्कृति में जाने के बाद हिंदू बहुसंख्यक होने के बावजूद चुपचाप अन्यायपूर्ण बंधनों को स्वीकार कर लेता है और भेदभाव सहन करता है। इसका अगला चरण यह होता है कि उसे नाशिक की टीसीएस कंपनी के उदाहरण की तरह अन्य धर्मीयों के अत्याचार भी सहन करने पड़ते हैं। जैसे अन्य धर्मों के लोग अपनी प्रथा-परंपराओं के पालन के लिए जागरूक रहते हैं, उसी प्रकार हिंदुओं को भी अपनी धार्मिक पहचान के संरक्षण के लिए जागरूक होकर ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ के विरोध में संगठित रूप से आवाज उठानी चाहिए। ऐसा करने पर हिंदू समाज और संगठन उनके साथ खड़े होंगे