बिजनौर/सहारनपुर। कोरोना काल की पाबंदियों के बीच थम गए पहिए अब एक बार फिर पटरियों पर दौड़ने को तैयार हैं। सहारनपुर और लखनऊ के बीच यात्रा करने वाले हज़ारों यात्रियों के लिए राहत भरी खबर सामने आ रही है। लंबे समय से बंद पड़ी सहारनपुर-लखनऊ पैसेंजर ट्रेन को फिर से शुरू करने की दिशा में रेल मंत्रालय ने सकारात्मक रुख दिखाया है।read more:https://pahaltoday.com/9-people-died-due-to-ac-explosion-15-were-saved/
सांसद की पैरवी और मंत्रालय का आश्वासन
हाल ही में बरेली के सांसद छत्रपाल गंगवार ने रेल मंत्री के साथ हुई बैठक में इस ट्रेन को पुन: संचालित करने की पुरजोर मांग रखी थी। सांसद ने रेल मंत्री को अवगत कराया कि इस ट्रेन के बंद होने से उत्तर प्रदेश के कई जिलों के यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रेल मंत्रालय के उच्च अधिकारियों ने इस प्रस्ताव पर विचार करने और प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का स्पष्ट आश्वासन दिया है।
गरीब और मध्यम वर्ग की लाइफलाइन
सहारनपुर-लखनऊ पैसेंजर ट्रेन केवल एक रेलगाड़ी नहीं, बल्कि क्षेत्र के मध्यम और गरीब वर्ग के लिए एक महत्वपूर्ण जीवनरेखा रही है। सस्ती दर पर सफर और छोटे-बड़े स्टेशनों पर ठहराव के कारण यह नौकरीपेशा, छोटे व्यापारियों और छात्रों की पहली पसंद रही है। वर्तमान में इस मार्ग पर कोई किफायती विकल्प न होने के कारण यात्रियों को निजी वाहनों या महंगी एक्सप्रेस ट्रेनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
वंदे भारत के साथ पैसेंजर की भी आस
रेलवे के गलियारों में जहाँ 8 नवंबर 2025 तक सहारनपुर और लखनऊ के बीच नई वंदे भारत एक्सप्रेस शुरू करने की योजना पर काम चल रहा है, वहीं स्थानीय लोग पैसेंजर ट्रेन को प्राथमिकता दे रहे हैं। यात्रियों का तर्क है कि वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों के साथ-साथ पैसेंजर ट्रेनों का होना अनिवार्य है, ताकि हर वर्ग का नागरिक सुगमता से यात्रा कर सके।
जल्द शुरू करने की उठ रही मांग
सहारनपुर, नजीबाबाद, मुरादाबाद और बरेली तथा छोटे रेलवे स्टेशन के रेल यात्रियों ने इस पहल का स्वागत किया है। यात्रियों का कहना है कि यदि यह ट्रेन जल्द शुरू होती है, तो सहारनपुर से लखनऊ तक का सफर न केवल सस्ता होगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा। अब सभी की निगाहें रेल मंत्रालय के आधिकारिक नोटिफिकेशन पर टिकी हैं।
सहारनपुर-लखनऊ पैसेंजर का चलना केवल परिवहन का मुद्दा नहीं, बल्कि उन हज़ारों लोगों की सामाजिक और आर्थिक ज़रूरत है जो हर रोज़ अपने काम के लिए इस रूट का इस्तेमाल करते हैं।