नगीना । जनपद में वर्तमान समय में कृषक अपने खेतों पर गन्ने की बुवाई का कार्य करने जा रहे हैं। गन्ने से उत्पादकता प्राप्त करने के लिए एवं गन्ने से अधिक आमदनी के लिए किसानो को आधुनिक गन्ना उत्पादन तकनीकी पर ध्यान देने की आवश्यकता है। कृषि विज्ञान केंद्र नगीना के प्रभारी अधिकारी डॉ के के सिंह ने बताया कि गन्ना की उच्च उत्पादकता हेतु मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन अति आवश्यक है, इसके लिए मृदा में जीवांश कार्बन बढाने की तकनीक पर कार्य करना अति आवश्यक होगा। इसके लिए वर्ष में कम से कम एक बार हरी खाद वाली फसल का अपने खेत में अवश्य प्रयोग करें। जिस खेत में बुवाई करनी है, 10-15 दिन पूर्व खेत की जुताई करने के बाद पलेवा करेॅ साथ ही गोबर की सड़ी खाद में तैयार ट्राइकोडर्मा का प्रयोग करें।read more:https://pahaltoday.com/ballia-police-receive-two-modern-interceptor-bikes-sp-omvir-singh-flags-them-off/बुवाई से पूर्व गन्ने के बीज का चयन सावधानी पूर्वक करें, बीज ऐसे खेत से चयनित करें जिस खेत में बीमारी का प्रकोप ना हो या नवीनतम प्रजाति का ही चयन करें।अस्वीकृत एवं रोगों के प्रति संवेदनशील किस्मों का चयन ना करें। गन्ने को 0238 के स्थान पर दूसरी नवीनतम स्वीकृत प्रजातियां जैसे को 15023 , कोशा 13235, कोलख 14201, कोलख 16202, कोशा 17231, कोशा 18231, कोशा 19231 जैसी प्रजातियों को अपनी खेती में स्थान दें। बीज की कटाई बुवाई के 1 दिन पूर्व ही करें, बीज को दो आंख के टुकड़े को काट लेना चाहिए। यदि सम्भव हो सके तो एक आंख की बुवाई करें। बुआई पूर्व बीज शोधन करने के लिए किसान साथियों 100 लीटर पानी में 200 ग्राम कार्बेंडाजिम एवं 150-200 मिली. क्लोरपायरीफास मिला ले। इस घोल में गन्ने के टुकड़े को 10 से 15 मिनट तक अवश्य भिगोए। बुवाई की उन्नत तकनीकी ट्रेन्च या रिंग पिट का प्रयोग करें। पोषक तत्व प्रबंधन हेतु अपने खेत की मृदा का परीक्षण अवश्य कराएं, मृदा परीक्षण उपरांत संस्तुति के आधार पर ही पोषक तत्व प्रबंधन करें।सामान्यत: पोषक तत्व के रुप में 180 किलोग्राम नत्रजन, 80 किलोग्राम फास्फोरस एवं 60 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें।