बहराइच l टीबी शुरुआती चरण में अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के चुपचाप फेफड़ों को नुकसान पहुंचाती रहती है। ऐसी ही छिपी हुई बीमारी की समय रहते पहचान के लिए जिले में 24 मार्च से 100 दिवसीय विशेष टीबी खोज अभियान चलाया जा रहा है। जिसके तहत अब तक 12,754 बिना लक्षण वाले लोगों का डिजिटल एक्स-रे कराया गया। एक्स-रे में हल्के संकेत मिलने पर जब सीबी-नाट जांच कराई गई, तो 66 लोगों में टीबी की पुष्टि हुई। खास बात यह रही कि इन लोगों को स्वयं भी अपने संक्रमित होने की जानकारी नहीं थी।read more:https://pahaltoday.com/quad-opposes-proposal-to-impose-toll-in-hormuz/
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय कुमार ने बताया कि अभियान के तहत स्वास्थ्य टीमों ने विशेष रूप से उन संवेदनशील क्षेत्रों और लोगों पर ध्यान केंद्रित किया है, जहां संक्रमण की आशंका अधिक होती है। इनमें कुपोषित व्यक्ति, मलिन बस्तियों में रहने वाले लोग, ईंट-भट्ठों और निर्माण स्थलों पर कार्यरत मजदूर, मधुमेह के रोगी, बुजुर्ग, पूर्व में इलाज करा चुके लोग तथा वर्तमान मरीजों के साथ रहने वाले लोग शामिल हैं। 1,686 नए मरीजों का इलाज शुरू- जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एमएल वर्मा ने बताया कि जिले में प्रस्तावित 350 विशेष शिविरों में से अब तक 152 का आयोजन किया जा चुका है। इन शिविरों के माध्यम से बिना लक्षण वाले 66 मरीजों के अलावा, लक्षणयुक्त 1,620 अन्य लोगों में भी टीबी की पुष्टि हुई है। बीते दो महीनों में कुल 1,686 नए मरीजों की पहचान कर उनका इलाज शुरू कर दिया गया है। वर्तमान में जनपद में लगभग 6,000 टीबी मरीज उपचाराधीन हैं, जिनकी नियमित दवा और पोषण सहायता सुनिश्चित की जा रही है। संकोच छोड़ें, जिम्मेदारी चुनें- सीएमओ डॉ. संजय कुमार ने बताया कि अक्सर लोग यह सोचकर जांच नहीं कराते कि जब खांसी या बुखार जैसे लक्षण नहीं हैं तो बीमारी कैसे हो सकती है, जबकि शुरुआती चरण में टीबी बिना लक्षण के भी हो सकती है। उच्च जोखिम समूह में इसके होने की आशंका अधिक रहती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि गांव, बस्ती या अस्पतालों में लगने वाले स्वास्थ्य विभाग के शिविरों में अपनी और परिवार की निशुल्क जांच अवश्य कराएं। समय पर पहचान और नियमित दवा से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है। जागरूक और सतर्क रहना ही इस अभियान का सबसे बड़ा संदेश है।