कानपुर देहात,शिक्षा अनमोल रतन है क्योंकि यह ऐसा धन है जिसे कोई चुरा नहीं सकता कोई छीन नहीं सकता। शिक्षा ही हमें ज्ञान, आत्मविश्वास और सही-गलत की समझ देती है। शिक्षा के द्वारा ही हम अंधविश्वास तथा कुप्रथाओं का अंत कर सभ्य नागरिकों का निर्माण कर सकते है। शिक्षा ही एक ऐसी शक्ति है जो हर किसी का जीवन रोशन करती है और समाज में उचित सम्मान दिलाती है।शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य सरकारी नौकरी पाना नहीं बल्कि व्यक्ति का सर्वांगीण विकास करना, समझ पैदा करना और समाज में मान-सम्मान दिलाना है। शिक्षा ही है जो हमें सही और गलत का फर्क सिखाती है, हमारा दृष्टिकोण व्यापक बनाती है और हमें समाज में एक गरिमापूर्ण स्थान दिलाती है। एक समय की बात है एक आश्रम में एक गुरुजी रहते थे। जहां रहकर अनेक शिष्य विद्याध्ययन करते थे। एक दिन एक शिष्य ने अपने गुरुजी से पूछा कि हमारे जीवन में शिक्षा क्यों जरूरी है? गुरु ने हस्ते हुए कहा कि एक दिन तुम्हें खुद ही इस प्रश्न का उत्तर मिल जाएगा। इसके बाद काफी दिन बीत गए।read more:https://pahaltoday.com/the-ceasefire-will-have-global-implications-for-energy-the-economy-and-diplomacy-which-will-be-a-relief-for-the-general-public/एक रात गुरु ने उस शिष्य को एक पुस्तक दी और कहा कि तुम इसे कमरे में रख आओ। शिष्य उस पुस्तक को लेकर गुरु के कमरे में गया, कमरे में अंधेरा था। जहां शिष्य को पैरों में कुछ महसूस हुआ। उसे लगा कि कमरे में सांप है, वह तुरंत दौड़कर बाहर आ गया। शिष्य ने गुरु से कहा कि कमरे में सांप है। गुरु ने कहा कि तुम्हें कोई भ्रम हुआ होगा। कमरे में सांप कैसे आ सकता है लेकिन शिष्य ने फिर अपनी बात दोहराई। गुरु ने शिष्य से कहा कि दीपक जलाकर कमरे में ले जाओ। अगर सांप होगा तो रोशनी देखकर वहां से चला जाएगा। गुरु की बात मानकर शिष्य कमरे में पहुंचा। वहां दीपक की रोशनी में उसने देखा कि वहां तो एक रस्सी का टुकड़ा पड़ा हुआ है वह भ्रम से रस्सी को ही सांप समझ बैठा था। बाहर आकर शिष्य ने गुरु को पूरी बात बताई। गुरु ने कहा कि पुत्र ये संसार भी एक अंधेरे कमरे की तरह ही है। यहां अगर हमारे साथ ज्ञान का प्रकाश नहीं होगा तो हम रस्सी को सांप समझते रहेंगे। अगर हम शिक्षा ग्रहण नहीं करेंगे तो इस संसार में अच्छे-बुरे का, सही-गलत का अंतर नहीं समझ सकेंगे। शिक्षा के बिना इंसान भ्रम, अज्ञानता और अंधविश्वास का शिकार हो जाता। शिक्षा केवल किताबी ज्ञान नहीं बल्कि जीवन जीने की कला सिखाती है। शिक्षित व्यक्ति अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहता है जो एक प्रगतिशील समाज के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक है।