प्रख्यात पुराणविद प्रोफेसर एच.एन.दुबे का जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया

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भदोही। भारत के शैक्षणिक एवं बौद्धिक वातावरण को समृद्ध करने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्त्व विभाग के प्रख्यात विद्वान प्रोफेसर एच. एन. दुबे का जन्म दिवस अत्यंत उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने उनके योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें जन्म दिवस की शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम का आयोजन गूगल मीट के माध्यम से किया गया, जहाँ मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट वक्ताओं ने प्रो. दुबे के व्यक्तित्त्व और कृतित्त्व पर प्रकाश डाला। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के पूर्व कुलपति प्रो. कपिल देव मिश्र ने प्रो. दुबे को ज्ञान, चरित्र और शीलता की त्रिवेणी कहते हुए  प्रो. दुबे के अध्यापन कार्य को याद किया।read more:https://pahaltoday.com/the-struggle-will-continue-until-nisha-gets-justice-shravan-raj/
प्रो. अर्चना खरे विभागाध्यक्ष प्राचीन इतिहास सी एम पी  ने अपना शोधार्थी जीवन याद करते हुए कि गुरुवर्य प्रोफेसर दुबे ने अपने अकादमिक जीवन में न केवल शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, बल्कि मुझ जैसे अनेक विद्यार्थियों का मार्गदर्शन कर उन्हें नई दिशा भी प्रदान की है। डॉ. सत्येंद्र कुमार आई ए एस ने प्रो. दूबे के जीवन को आदर्श बताया और उसका अनुसरण करने की बात कही। डॉ. आशीष कुमार मिश्र ने प्रो. दुबे के सानिध्य में रहकर अपने छात्र जीवन को याद करते हुए कहा कि मैं आज पुलिस सेवा में रहकर आदरणीय गुरुदेव द्वारा दिखाये गये रास्ते पर चलकर समाज की सेवा कर रहा हूँ । डॉ प्रज्ञा मिश्रा सहायक आचार्य ने गुरुवर्य को जन्म दिन की अनेकशः बधाई दी। डॉ. सरला ने प्रो. दुबे की कक्षाओं को याद किया।डॉ.जितेंद्र कुमार डिप्टी कमिश्नर वाणिज्य विभाग ने प्रो. दुबे की सरलता एवं विद्यार्थियों के लिए सुगमता की चर्चा करते हुए उनके सौ वर्ष से अधिक जीवन जीने की कामना की । डॉ. पंकज कुमार जिला सूचना अधिकारी ने प्रो. दुबे के कृतित्व पर प्रकाश डालते उनके दीर्घायु होने की कामना की। शिवांश तिवारी ने प्रो. दुबे के व्यक्तित्व को विद्वता, दक्षता, शील, संक्रांति, अनुशीलन, सचेतत्व, और प्रसन्नता का समन्वय बताया। कार्यक्रम में उपस्थित शोधार्थियों ने उनके कार्यों को प्रेरणास्रोत बताते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का संचालन निखिल भारतीय इतिहास शोध संस्थान के महासचिव डॉ. शिवा कांत त्रिपाठी ने करते हुए कहा कि सम्पूज्य गुरुवर्य के जन्म दिन की वास्तविक सार्थकता तब सिद्ध होगी जब हम उनके द्वारा बताये गये रास्ते पर चलकर शिक्षा एवं प्रशासनिक क्षेत्र में एक आदर्श उपस्थित कर सकें। इस अवसर पर श्रीमती मिथिलेश दुबे ,डॉ प्रत्यंचा पाण्डेय, डॉ आनंद मिश्रा स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी,  डॉ शाम्भवी शुक्ला, सिंपल शुक्ला,  डॉ शिशिर कान्त ,  डॉ आनन्द मिश्रा प्रवक्ता , संग्राम सिंह, सत्यम दुबे, डॉ रमेश कुमार, युवराज सिंह, अंकुर पाण्डेय, दिव्या भरद्वाज, शिल्पा मजूमदार इत्यादि उपस्थित रहे तथा सभी ने गुरु जी को जन्म दिन की बधाई प्रेषित की।

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