वाराणसी – केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने कहा है कि शिक्षण कार्य केवल एक तकनीकी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं से भरी एक कला है। उन्होंने रेखांकित किया कि कक्षा में शिक्षक द्वारा दी गई सीख और अनुशासन विद्यार्थी के जीवन को हमेशा के लिए बदल देते हैं।
जयंत चौधरी ने वैश्विक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि OECD के ‘टीचर नॉलेज सर्वे 2026’ के अनुसार, किसी विषय का गहरा ज्ञान होना और उसे प्रभावी ढंग से पढ़ा पाना—ये दोनों अलग-अलग कौशल हैं। उन्होंने यूनेस्को (UNESCO) की ‘ग्लोबल रिपोर्ट ऑन टीचर्स 2024’ का उल्लेख करते हुए चेतावनी दी कि वर्ष 2030 तक दुनिया को 44 मिलियन (4.4 करोड़) नए शिक्षकों की आवश्यकता होगी, ताकि शिक्षा प्रणाली को सही ढंग से चलाया जा सके।read more:https://pahaltoday.com/manveer-singh-arrested-near-nepal-border-sent-to-punjab-under-tight-security/
भारत सरकार की प्रमुख पहलें
भारत में शिक्षा के स्तर को सुधारने और शिक्षकों को सशक्त बनाने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी देते हुए उन्होंने निम्नलिखित योजनाओं का जिक्र किया:
एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम (ITEF): NEP 2020 के तहत लागू 4-वर्षीय डिग्री, जो विषय ज्ञान और अध्यापन कला दोनों को जोड़ती है।
राष्ट्रीय पेशेवर मानक (NPST): शिक्षकों की पदोन्नति को केवल वरिष्ठता से न जोड़कर उनके पढ़ाने की वास्तविक गुणवत्ता से जोड़ना।
नेशनल मिशन फॉर मेंटरिंग (NMM): अनुभवी मार्गदर्शकों के माध्यम से शिक्षकों को निरंतर सहयोग प्रदान करना।
उल्लास (ULLAS) व विद्यांजलि योजना: साक्षरता बढ़ाने और स्कूलों में वॉलंटियर-आधारित योगदान को प्रोत्साहन। इस अभियान के तहत 9 राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों को पूर्ण साक्षर घोषित किया गया है।
सभी विधाओं के शिक्षकों को मिले सम्मान
केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि केवल पारंपरिक विषयों के शिक्षकों को ही नहीं, बल्कि संगीत, खेल, शारीरिक शिक्षा और ITI जैसे व्यावसायिक (Vocational) संस्थानों के प्रशिक्षकों को भी समान दर्जा दिया जाना चाहिए। ये सभी विधाएं भारत की बढ़ती ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ (रचनात्मक अर्थव्यवस्था) और इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
उन्होंने अंत में कहा कि ऑटोमेशन और मशीनों के इस दौर में कोई भी एल्गोरिदम एक शिक्षक की जगह नहीं ले सकता। शिक्षक केवल परीक्षाओं के लिए नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने के लिए विद्यार्थियों को तैयार करते हैं।