नई दिल्ली : इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (आईएचएफएल) से जुड़े कथित संदिग्ध लेनदेन की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सीबीआई और दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई।मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने कहा कि जांच एजेंसियों की चुप्पी ‘चौंकाने वाली’ है और यह मामला प्रथम दृष्टया ‘लेन-देन (क्विड प्रो क्वो)’ जैसा दिखाई देता है। अदालत ने कहा कि एजेंसियों ने अब तक न तो नियमित मामला (आरसी) दर्ज करने पर अंतिम फैसला लिया और न ही जांच की स्थिति बताने वाली रिपोर्ट अदालत में दाखिल की।सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि सीबीआई और ईओडब्ल्यू ने अदालत के पहले के निर्देशों का भी पालन नहीं किया। पीठ ने कहा कि दोनों एजेंसियों के प्रमुखों को अदालत में तलब किया जा सकता था, लेकिन अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने भरोसा दिया कि दो सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा और स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी जाएगी। इसके बाद अदालत ने फिलहाल सीबीआई निदेशक और दिल्ली पुलिस आयुक्त की व्यक्तिगत उपस्थिति का आदेश टाल दिया। मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि जनवरी से जुलाई तक सीबीआई क्या कर रही थी और ईओडब्ल्यू अब तक अदालत को जांच की जानकारी देने से क्यों बचती रही। readmore:https://khabarentertainment.in/staff-nurse-accuses-blood-center-operator-of-sexual-harassment-intimidation-and-mental-harassment-case-registered/
सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों से क्या सवाल पूछे?
अदालत ने कहा कि किसी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने का उसका इरादा नहीं है, लेकिन अगर जांच में कोई अपराध नहीं बनता तो एजेंसियों को यह बात स्पष्ट रूप से अदालत के सामने रखनी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि कर्ज की पूरी राशि ब्याज सहित वापस कर दी गई है और इसलिए कोई अपराध नहीं बनता, तो जांच एजेंसियों को साहस के साथ यह कहना चाहिए। अदालत ने यह भी पूछा कि ईओडब्ल्यू ने अब तक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल क्यों नहीं की। पीठ ने सीबीआई और ईओडब्ल्यू के आचरण को “बेहद संदिग्ध” बताया।
याचिकाकर्ता और सरकार की ओर से क्या दलील दी गई?
एनजीओ सिटिजंस व्हिसलब्लोअर्स फोरम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि जनवरी में सीबीआई द्वारा दाखिल हलफनामे में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की जांच में धन के कथित दुरुपयोग के मामले सामने आने का जिक्र था। उन्होंने कहा कि ईओडब्ल्यू ने कुछ एफआईआर दर्ज की हैं और सीबीआई, ईडी द्वारा चिह्नित पांच मामलों को यस बैंक जांच के साथ जोड़ने पर विचार कर रही थी। भूषण ने यह भी बताया कि इंडियाबुल्स के पूर्व प्रवर्तक समीर गहलौत लंदन चले गए हैं और मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया जाना चाहिए। वहीं, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने कहा कि जांच जारी है। उन्होंने बताया कि एक मामले की जांच सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) कर रहा है, जबकि चार मामलों की जांच ईओडब्ल्यू कर रही है।