सीईपीसी के प्रतिनिधिमंडल ने डीएम भदोही संग लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की भेंट 

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भदोही। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के प्रतिनिधिमंडल ने लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट की। प्रतिनिधिमंडल में डीएम भदोही शैलेश कुमार, सीईपीसी अध्यक्ष कैप्टन मुकेश कुमार गोम्बर, उपाध्यक्ष असलम महबूब एवं प्रशासनिक समिति के सदस्य पियूष कुमार बरनवाल, संजय गुप्ता और इम्तियाज़ अहमद शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल ने भदोही में आयोजित होने वाले 50वें इंडिया कार्पेट एक्सपो (गोल्डेन जुबली मेले) में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री को आमंत्रित किया।इस अवसर पर डीएम ने जिले में कालीन उद्योग के महत्व, उद्योग से जुड़े बुनकरों एवं कारीगरों की भूमिका तथा भदोही में आयोजित होने वाले 50वें इंडिया कार्पेट एक्सपो की तैयारियों एवं आयोजन के महत्व के संबंध में मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया। उन्होंने भदोही के कालीन उद्योग के विकास एवं निर्यात को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक सहयोग एवं सुविधाओं के संबंध में भी चर्चा की।सीईपीसी अध्यक्ष कैप्टन मुकेश कुमार गोम्बर ने उत्तर प्रदेश के समृद्ध कालीन उद्योग के विकास, निर्यात को बढ़ावा देने तथा इस क्षेत्र से जुड़े लाखों बुनकरों एवं कारीगरों के हित में उत्तर प्रदेश के लिए एक समर्पित कालीन नीति बनाने एवं लागू करने के लिए मुख्यमंत्री से आग्रह किया।read more:https://pahaltoday.com/demand-to-remove-government-country-liquor-shop-villagers-stage-protest-at-the-collectorate/#google_vignette
सीईपीसी उपाध्यक्ष असलम महबूब ने बताया कि उत्तर प्रदेश विशेष रूप से भदोही, मिर्जापुर, वाराणसी एवं आसपास के क्षेत्रों में कालीन उद्योग का एक प्रमुख केंद्र है। इस उद्योग से बड़ी संख्या में बुनकर, कारीगर, श्रमिक, निर्यातक एवं अन्य संबंधित व्यवसाय जुड़े हुए हैं। एक समर्पित कालीन नीति के माध्यम से उद्योग को आधुनिक तकनीक, निवेश, निर्यात, कौशल विकास, आधारभूत संरचना तथा रोजगार के क्षेत्र में नई संभावनाएं मिल सकती हैं। मुख्यमंत्री ने कालीन नीति बनाए जाने की चर्चा पर सकारात्मक सहमति व्यक्त की। मुख्यमंत्री की इस सकारात्मक पहल का सीईपीसी एवं कालीन उद्योग से जुड़े सभी प्रतिनिधियों ने स्वागत किया। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि भदोही के हस्तनिर्मित कालीन को 3 सितम्बर 2010 को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्राप्त हुआ है, जो इसकी विशिष्ट पहचान, पारंपरिक शिल्पकला एवं गुणवत्ता का प्रतीक है। प्रतिनिधिमंडल ने जीआई कालीनों की ब्रांडिंग एवं प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने, निर्यात को प्रोत्साहित करने तथा बुनकरों एवं कारीगरों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए विशेष पहल किए जाने का आग्रह किया, जिससे उद्योग को मजबूती मिले और रोजगार एवं आय के अवसर बढ़ें।

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