हरिकृष्ण कश्यप कानपुर देहात। परिवहन आयुक्त के निर्देश पर संभागीय परिवहन अधिकारी प्रयागराज हिमेश तिवारी ने 05 सितंबर को ARTO कानपुर देहात कार्यालय में औचक निरीक्षण किया, लेकिन उन्हें एक भी दलाल नहीं मिला। अब इसी ‘क्लीन चिट’ पर सवाल उठ रहे हैं।सूत्रों का दावा है कि साहब के आने की भनक कार्यालय में पहले ही लग चुकी थी। इसीलिए निरीक्षण के दौरान सब कुछ ‘ऑल इज ओके’ मिला।read more:https://pahaltoday.com/manveer-singh-arrested-near-nepal-border-sent-to-punjab-under-tight-security/
*जमीनी हकीकत क्या है?*
स्थानीय लोगों और अधिवक्ताओं का कहना है कि यह वही कार्यालय है जहां रोजाना एक नहीं, दर्जनों कथित दलालों की मौजूदगी की चर्चाएं रहती हैं। अचरज की बात है कि इतने बड़े औचक निरीक्षण में एक भी नहीं मिला।सूत्र बता रहे हैं कि अब खेल का तरीका बदल गया है। कथित दलाल कार्यालय परिसर के अंदर आने के बजाय बाहर बैठकर कार्यालय के अंदर सक्रिय कथित ‘खजांचियों’ के माध्यम से कोड वर्ड पर काम करा रहे हैं। यदि छापामारी कानपुर की तर्ज पर बिना भनक लगे की जाती तो तस्वीर कुछ और होती।
*सरकारी गाड़ी के सारथी पर भी सवाल*
चर्चा तो यहां तक है कि ARTO प्रवर्तन प्रथम की सरकारी गाड़ी चलाने वाला एक युवक, जो पहले इसी कार्यालय का कथित दलाल बताया जाता है, आज लोकेशनबाजों के लिए मददगार की भूमिका में है।गौरतलब है कि विगत वर्षों में इसी कार्यालय के बाहर फर्जी लर्निंग लाइसेंस बनाने वाले गिरोह के तीन सदस्यों को अकबरपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था।सवाल बड़ा है – जब फर्जी लाइसेंस का रैकेट इसी परिसर के आसपास पनप रहा था, तो क्या वाकई यह कार्यालय पूरी तरह दलाल-मुक्त हो गया है, या फिर निरीक्षण सिर्फ एक औपचारिकता बनकर रह गया?
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