म्योरपुर (सोनभद्र)। सिंगरौली परिक्षेत्र में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर क्षेत्रीय लोगों में चिंता बढ़ती जा रही है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कोयला एवं राख (फ्लाई ऐश) के परिवहन में बरती जा रही लापरवाही के कारण वातावरण में धूलकणों की मात्रा लगातार बढ़ रही है, जिससे चर्म रोग, दमा तथा अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) से कोयले तथा विभिन्न ताप विद्युत परियोजनाओं से निकलने वाली राख का परिवहन करने वाले कई वाहनों में तिरपाल का समुचित उपयोग नहीं किया जाता। कई बार फटे हुए तिरपाल लगाए जाने अथवा वाहनों को पूरी तरह न ढंकने के कारण धूल और राख के कण खुले वातावरण में फैलते रहते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, सिंगरौली परिक्षेत्र के मोरवा, बरगवां, निगाही, जयंत और बलियानाला सहित सोनभद्र जिले के शक्तिनगर, बीना, अनपरा और म्योरपुर क्षेत्र में त्वचा संबंधी रोगों एवं श्वसन समस्याओं के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि पहले से ही क्षेत्र के कई इलाकों में पेयजल प्रदूषण की समस्या बनी हुई है, ऐसे में बढ़ता वायु प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। क्षेत्र के कुछ निवासियों ने दावा किया कि लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण में रहने के कारण उन्हें त्वचा संक्रमण और श्वसन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।read more:https://pahaltoday.com/the-consumer-commission-settled-the-matter-by-giving-a-cheque-of-rs-55040/उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और गंभीर रूप धारण कर सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार वायु प्रदूषण फेफड़ों के संक्रमण, अस्थमा, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), ब्रोंकाइटिस तथा अन्य श्वसन रोगों का खतरा बढ़ा सकता है। लंबे समय तक धूल एवं प्रदूषित कणों के संपर्क में रहने से फेफड़ों और हृदय संबंधी बीमारियों की आशंका भी बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का कड़ाई से पालन किया जाना आवश्यक है। नितिन सिंह, उमेश वैश्य, विश्वजीत, प्रिंस पांडेय, शिव कुमार, संतराम कुशवाहा, राणा आदित्य, प्रशांत दुबे और दीपू वैश्य सहित कई स्थानीय लोगों ने प्रशासन एवं संबंधित कंपनियों से कोयला और राख परिवहन के दौरान निर्धारित मानकों का सख्ती से पालन कराने, वाहनों को पूरी तरह ढंकने तथा नियमित प्रदूषण निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।