बाराबंकी। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी दस माह बाकी हैं, पर राजनीतिक दलों ने चुनाव के लिए कमर कसनी शुरू कर दी है। लोकसभा चुनाव में औसत प्रदर्शन के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपना जनाधार बढ़ाने की तैयारी कर रही है, ताकि जातीय समीकरणों के जरिए आगामी विधानसभा चुनाव में एतिहासिक जीत दर्ज कर सके। दरअसल, भाजपा भी सपा की पीडीए रणनीति के जोखिम को खूब समझ रही है और अब इसके जवाब में भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में पिछड़ा, दलित और राष्ट्रवाद (पीडीआर) की रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। संगठन से लेकर सरकार तक पिछड़े और अनुसूचित जाति के चेहरों को तवज्जो देकर पकड़ मजबूत करने की कोशिश है तो दूसरी तरफ राष्ट्रवाद की अलख के सहारे मतदाताओं की गोलबंदी का प्रयास भी हो रहा है। बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव में सदर विधानसभा से भाजपा ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 90 हजार का आकड़ा पार किया, जोकि भाजपा प्रत्याशी के तौर पर अब तक का सबसे बेहतर प्रदर्शन माना जा रहा है। ज्ञातव्य हो कि विगत विधानसभा चुनाव में तत्कालीन भाजपा जिलाध्यक्ष अरविन्द मौर्य की पत्नी डॉ रामकुमारी मौर्य को भाजपा ने उम्मीदवार बनाया था। जोकि पिछड़ी जाति से आती है। इस चुनाव में वह उपविजेता रही जिसमें उनको करीब 90,450 वोट मिले, जबकि सपा उम्मीदवार सुरेश यादव ने 1,25,500 वोट पाकर लगातार तीसरी बार विधायक बने। वहीं बसपा से पहली बार चुनाव में उतरे डॉ विवेक सिंह वर्मा को महज 42,506 वोटों से संतोष करना पड़ा। चुनाव में डॉ विवेक वर्मा काफी प्रयास के बाद भी कुर्मी बिरादरी का वोट बसपा में वापसी नहीं करा पाए। जबकि कर्मी बिरादरी का बहुतायत वोट भाजपा में चला गया। जिसका परिणाम यह हुआ कि भाजपा 90 हजार का आकड़ा पार कर गई। राजनीतिक विशलेष्कों को मानना है कि भाजपा यदि 2027 के विधानसभा चुनाव में किसी कुर्मी समाज के व्यक्ति को टिकट देती है तो निश्चित तौर पर अप्रत्याशित जीत दर्ज होगी।read more:https://pahaltoday.com/makanpur-sharif-former-head-ruman-siddiqui-reached-the-court-of-hazrat-syed-badiuddin-zinda-shah-madar/ बहरहाल, विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां जैसे-जैसे बढ़ रही है वैसे-वैसे भाजपा के संभावित उम्मीदवारों ने कमर कसनी शुरू कर दी है। सूत्रों की माने तो भाजपा में डॉ रामकुमारी मौर्य, राकेश कुमार वर्मा ‘कर्रा’, डॉ विवेक सिंह वर्मा, धर्मेन्द्र यादव, डॉ सतीश चन्द्रा के अलावा कई अन्य संभावित नामों की चर्चा हो रही है। इन नामों में राकेश वर्मा ‘कर्रा’ का नाम शीर्ष नेतृत्व में काफी प्रचलित माना जा रहा है। हाल ही में हुए एक चुनावी सर्वे में राकेश वर्मा को भाजपा का संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है। राकेश वर्मा मूल रूप से सदर विधानसभा के देवा विकासखंड के ग्राम कर्रा के रहने वाले हैं, हाल के दिनों में वह कुर्मी समुदाय के एक प्रमुख चेहरा बनकर उभरे हैं। यही नहीं भाजपा में कई वरिष्ठ नेताओं और संघ से जुड़े लोगों का उन्हें विश्वासपात्र माना जाता है। स्थानीय लोगों को मानना है कि राकेश वर्मा न सिर्फ पिछड़े, दलित व अगड़े के साथ राष्ट्रवाद को धार दे रहे है बल्कि सपा के पीडीए को भी कमज़ोर करने का काम कर रहे है। सूत्रों को मानना है कि राकेश वर्मा का यह पहला विधानसभा चुनाव है, लेकिन उनकी सदर विधानसभा में मजबूत पकड़ मानी जाती है। जिले के कद्दावर नेता एवं सूबे की सरकार में कई बार मंत्री रहे स्व. संग्राम सिंह वर्मा जिन्हें कद्दावर कुर्मी चेहरे के तौर पर गिना जाता रहा है। वह सदर विधानसभा से कई बार विधायक रहे। उनकी धारदार चुनावी रणनीति के पीछे राकेश वर्मा की बड़ी भूमिका मानी जाती है। वह परदे के पीछे से चाणक्य की भूमिका में चुनाव का संचालन करते और जनता से सीधे सम्पर्क में रहते थे। राकेश वर्मा करीब डेढ़ दशक से भारतीय जनता पार्टी में सक्रीय है। उनकी सियासत पार्टी के कार्यक्रमों तक ही सीमित रही। उन्होंने अयोध्या में नवनिर्मित श्रीराम मंदिर परिसर में कई अभूतपूर्व कार्यों को धरातल पर उतारने में सरकार का सहयोग किया। हाल के दिनों में सदर विधानसभा में उनकी बढ़ती सक्रियता और पार्टी की योजनाओं के प्रचार प्रसार को गति देने में उनकी खूब चर्चा रहती है। ऐसे में भाजपा के संभावित नामों में एक प्रमुख नाम राकेश वर्मा ‘कर्रा’ का उभर कर आया है जोकि सपा के पीडीए का विकल्प बनकर भाजपा की जीत सुनिश्चित करा सकते है।