उन्नाव। मेरठ से प्रयागराज तक गंगा एक्सप्रेस-वे की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्नाव क्षेत्र में बसीरतगंज की ओर से टोल के रास्ते एक्सप्रेस-वे पर चढ़ने के बाद दाईं ओर किलोमीटर संख्या 423.9 और 420.5 के आसपास सड़क का किनारा कई स्थानों पर धंसता और क्षतिग्रस्त होता दिखाई दे रहा है। हालात यह हैं कि कुछ जगहों पर सड़क के किनारे का पूरा हिस्सा नीचे बैठ गया है। निर्माणदायी संस्था की ओर से फिलहाल क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत का काम कराया जा रहा है।स्थानीय स्तर पर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर तीन सप्ताह के भीतर एक ही हिस्से में बार-बार धंसाव क्यों हो रहा है? यही समस्या एक्सप्रेस-वे की दूसरी तरफ भी कई स्थानों पर दिखाई दे रही है। सोशल मीडिया पर सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्सों की तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद मरम्मत का काम शुरू कर दिया जाता है, लेकिन कुछ समय बाद फिर वही स्थिति सामने आने से निर्माण की गुणवत्ता और स्थायी समाधान को लेकर सवाल उठ रहे हैं।read more:https://pahaltoday.com/villagers-upset-over-garbage-dumping-staged-a-protest-at-the-district-collectorate/
ड्रेनेज व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों और मौके की स्थिति के अनुसार, समस्या की एक बड़ी वजह बरसात के पानी की समुचित निकासी नहीं होना बताई जा रही है। एक्सप्रेस-वे के किनारे बने स्लोप के नीचे पानी जमा होने से मिट्टी की पकड़ कमजोर होने की आशंका है। बताया जा रहा है कि स्लोप में पीली बालू की मिट्टी, जियो प्लास्टिक और कंक्रीट का इस्तेमाल किया गया है। लगातार पानी जमा रहने से मिट्टी की सतह कमजोर पड़ती है और स्लोप का ढांचा प्रभावित होकर नीचे की ओर खिसकने लगता है। इसका असर धीरे-धीरे एक्सप्रेस-वे की ऊपरी सतह तक पहुंचने से दरार और धंसाव की स्थिति पैदा हो सकती है।लगातार हो रही बारिश ने समस्या को और गंभीर कर दिया है। आसपास के ग्रामीणों का कहना है कि सई नदी की ओर से बरसात का पानी उलटे बहकर एक्सप्रेस-वे की तरफ आ रहा है, जिससे आसपास के खाली हिस्सों में पानी जमा हो रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक पानी की निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से यह जलभराव एक्सप्रेस-वे के किनारे के ढांचे को प्रभावित कर रहा है।
बारिश में निर्माण की मजबूती पर भी सवाल
लगातार बारिश के बीच निर्माण कार्य और मरम्मत को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। निर्माण की सतह को पूरी तरह सूखने और आवश्यक मजबूती हासिल करने का पर्याप्त समय नहीं मिलने पर मरम्मत कितनी टिकाऊ होगी, यह भी चिंता का विषय है। हालांकि, इन तकनीकी कारणों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित निर्माण एजेंसी या सक्षम विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।गंगा एक्सप्रेस-वे पर उन्नाव का यह हिस्सा इन दिनों लगातार चर्चा में है। इससे पहले लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे पर सामने आई खामियों को लेकर भी सवाल उठे थे। अब गंगा एक्सप्रेस-वे पर बार-बार हो रहे धंसाव ने निर्माण की गुणवत्ता, जल निकासी और तकनीकी निगरानी को लेकर बड़ा सवाल है।फिलहाल क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत का काम जारी है, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि बार-बार होने वाले धंसाव का स्थायी समाधान कब होगा और इसकी वास्तविक वजह क्या है? लगातार सामने आ रही तस्वीरों ने विपक्ष को भी सरकार और निर्माण एजेंसी पर सवाल उठाने का एक और मुद्दा दे दिया है।