नूरपुर / राजा का तालाब (AMI News): देश को बिजली और खेतों को पानी देने के लिए अपनी जमीन और घर कुर्बान करने वाले पोंग बांध विस्थापित 55 साल बीत जाने के बाद भी अपने हक के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। नूरपुर के राजा का तालाब में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में विस्थापितों का गुस्सा प्रदेश सरकारों और जन प्रतिनिधियों के खिलाफ खुलकर सामने आया। बैठक के दौरान विस्थापितों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राजस्थान के श्री गंगानगर में उनके लिए आरक्षित करीब सवा दो लाख एकड़ जमीन में से 1,188 मुरब्बों पर भू-माफियाओं का अवैध कब्जा है।read more:https://pahaltoday.com/woman-posing-as-a-bride-flees-after-administering-a-sedative-remains-at-large-even-after-a-month-and-a-half/ उन्होंने सवाल उठाया कि जब यह जमीन विस्थापितों के नाम पर आरक्षित थी, तो इस पर भू-माफिया का कब्जा कैसे हो गया? 55 वर्षों से केवल खोखले वादे मिलने से क्षुब्ध विस्थापितों ने अब केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से इस मामले में सीधे हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि उन्हें जैसलमेर की बंजर जमीन नहीं, बल्कि श्री गंगानगर में उनके नाम आरक्षित उपजाऊ जमीन ही चाहिए, अन्यथा यह आंदोलन और उग्र रूप धारण करेगा। वक्ताओं ने कहा कि विस्थापितों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर अपने वोट की कीमत समझनी होगी और एकजुट होकर लड़ाई लड़नी होगी। साथ ही, उन्होंने मांग उठाई कि जिस तरह किसानों को सम्मान निधि दी जाती है, उसी तर्ज पर पोंग बांध प्रभावित हर परिवार को “पोंग बांध सम्मान निधि” दी जानी चाहिए।