जमानियां। ग्यारहवीं शरीफ के मुबारक मौके पर हजरत गौस-ए-पाक शैख अब्दुल कादिर जीलानी रहमतुल्लाहि अलैह की याद में लोदीपुर स्थित मिलन लॉन में जलसे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन मिलन लॉन के संस्थापक हाजी इकबाल हसन उर्फ तबस्सुम सिद्दीकी की ओर से किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मिलाद शरीफ से हुई। इसके बाद आयोजित जलसे में दूर-दराज से पहुंचे उलेमा-ए-किराम ने नातिया कलाम और मनकबत पेश कर माहौल को अकीदत से सराबोर कर दिया।
जलसे में उलेमाओं ने गौस-ए-आजम की सीरत, उनकी शिक्षाओं और सूफी परंपरा में उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। मोहल्ला लोदीपुर स्थित नूरी मस्जिद के इमाम अशरफ करीम कादरी ने गौस-ए-आजम की शान में मनकबत और कलाम पेश किया। उन्होंने अपनी तकरीर में इस्लाम की शिक्षाओं, इंसानियत, मोहब्बत तथा गौस-ए-पाक द्वारा बताए गए रास्ते पर चलने की सीख दी।read morehttps://pahaltoday.com/villagers-upset-over-garbage-dumping-staged-a-protest-at-the-district-collectorate/\उन्होंने बताया कि हजरत शैख अब्दुल कादिर जीलानी को गौस-ए-आजम, बड़े पीर और पीरान-ए-पीर के नाम से जाना जाता है। उनका जन्म ईरान के जिलान क्षेत्र में हुआ था और उनका विसाल बगदाद में हुआ, जहां उनका मजार स्थित है। उन्होंने कादरिया सूफी सिलसिले की स्थापना की तथा शरीयत और तरीकत के बीच समन्वय स्थापित करते हुए इंसानियत, प्रेम और तौहीद का संदेश दिया।इस मौके पर घर में तैयार पकवान पर फातेहा और नियाज किया गया। इसके बाद उपस्थित लोगों के बीच तबर्रुक और लंगर वितरित किया गया। मिलन लॉन के संस्थापक हाजी तबस्सुम सिद्दीकी ने जलसे में शामिल सभी उलेमा का स्वागत करते हुए उन्हें ‘जाने गौसे आजम कांफ्रेंस’ की शील्ड भेंट कर सम्मानित किया।कार्यक्रम में अलहाज मोहम्मद अशरफ करीम, हजरत मौलाना मुफ्ती तौहीद अहमद, मौलाना अहमदुल्ला कादरी, रशीद रजा गाजीपुरी, जफरूल हसन गाजीपुरी, हाफिज अहमद रजा, मोहम्मद आवेज सिद्दीकी, फरमान सिद्दीकी, गुड्डू खान, हाजी तबस्सुम सिद्दीकी, मौलाना महमूद हसन, इशरत सिद्दीकी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।