सीएम और एसडीएम से लगाई न्याय की गुहार

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बहराइच ( महसी )। उत्तर प्रदेश सरकार की ‘अंत्योदय’ और ‘सबका साथ, सबका विकास’ जैसी जनकल्याणकारी योजनाएं बहराइच जिले में धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही हैं। जनपद के विकासखंड महसी अंतर्गत ग्राम पंचायत लोधौनी, मजरा बरोलिया का एक संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां के निवासी आनंद कुमार पुत्र दुखारन, जो 80 प्रतिशत दिव्यांग हैं, आज भी सरकारी व्यवस्था की घोर लापरवाही और संवेदनहीनता के कारण बुनियादी अधिकारों के लिए तरस रहे हैं।
पीड़ित आनंद कुमार के पास मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) द्वारा प्रमाणित 80 फीसदी दिव्यांगता का प्रमाण पत्र मौजूद है। इसके बावजूद, स्थानीय प्रशासन की उदासीनता के चलते उन्हें आज तक कोई भी महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी लाभ नहीं मिल सका है।आनंद कुमार का आरोप है कि शारीरिक रूप से अक्षम होने के बावजूद उन्हें अब तक चलने-फिरने के लिए एक अदद दिव्यांग ट्राइसाइकिल तक नसीब नहीं हुई है। इतना ही नहीं, सिर छुपाने के लिए प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री आवास योजना और बुनियादी स्वच्छता के लिए शौचालय योजना का लाभ भी उन्हें नहीं मिला है।पीड़ित ने बताया कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय है। घर में कोई भी कमाने वाला सदस्य नहीं है, जिससे दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा रहता है।read more:https://khabarentertainment.in/cunning-man-arrested-for-pressuring-woman-into-marriage-through-blackmail/ उनके वृद्ध माता-पिता भी उनसे अलग रहते हैं, जिसके कारण वह बिल्कुल बेसहारा हो गए हैं। आनंद कुमार के परिवार में एक मासूम बेटी भी है, जिसकी परवरिश और भविष्य की जिम्मेदारियों ने उनकी चिंताओं को और अधिक बढ़ा दिया है।स्थानीय ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर कोई सुनवाई न होने से हताश होकर पीड़ित आनंद कुमार ने न्याय के लिए उच्चाधिकारियों का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) महसी को एक लिखित प्रार्थना पत्र सौंपकर अपनी व्यथा सुनाई है। इसके साथ ही, उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप करने और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की भावुक अपील की है।आनंद कुमार का गंभीर आरोप है कि मुख्यमंत्री और एसडीएम को शिकायत भेजने के कई दिन बीत जाने के बाद भी जिला प्रशासन और संबंधित विभाग  अब तक उदासीन बना हुआ है। अब तक न तो उनकी समस्या का समाधान किया गया है और न ही किसी ब्लॉक या तहसील स्तरीय अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर उनकी वास्तविक स्थिति की सुध ली है। यह मामला बहराइच के स्थानीय प्रशासन सहित जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। एक तरफ जहां सरकार दिव्यांगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ 80 फीसदी दिव्यांग व्यक्ति का फाइलों और दफ्तरों के चक्कर काटना प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।लोधौनी ग्राम पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों और ग्राम विकास अधिकारी (VDO) की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पात्रता की श्रेणी में सबसे ऊपर होने के बावजूद आनंद कुमार का नाम योजनाओं की सूची से बाहर कैसे रहा? अब देखना यह होगा कि इस खबर के उजागर होने के बाद बहराइच का जिला प्रशासन कुंभकर्णी नींद से जागता है या पात्र दिव्यांग को अपने हक के लिए यूं ही भटकना पड़ेगा।

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